भारत-पाक रिश्तों में आतंक सबसे बड़ी बाधा, सिंधु जल संधि पर राजदूत विनय क्वात्रा का बड़ा बयान
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि इस्लामाबाद ने उस दोस्ती की भावना को खत्म करने में आधी सदी बिता दी, जिस पर सिंधु जल संधि (IWT) हुई थी। उन्होंने कहा कि IWT को रोकने का दिल्ली का फैसला सिर्फ उस स्थिति को लेकर था, जिसे पाकिस्तान के व्यवहार ने पहले ही खत्म कर दिया। न्यूज़वीक मैगज़ीन में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने कहा कि 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का भारत का फैसला पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले का सीधा जवाब था।
नई दिल्ली
विनय क्वात्रा ने कहा कि जल समझौते को लेकर पाकिस्तान की युद्ध की धमकियां केवल अपनी अंदरूनी समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पाकिस्तान वास्तव में द्विपक्षीय मुद्दों पर भारत का सहयोग चाहता है तो उसे सबसे पहले उस आतंकी ढांचे को खत्म करना होगा, जिसे उसने खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि संधि की प्रस्तावना में इसे अच्छी नीयत और दोस्ती की भावना के साथ किया गया समझौता बताया गया है, लेकिन पाकिस्तान ने पिछले कई दशकों में उसी भावना को समाप्त कर दिया।
भारतीय राजदूत का यह लेख पाकिस्तान द्वारा इस्लामाबाद में आयोजित उस सम्मेलन के कुछ दिनों बाद सामने आया, जिसमें 1960 की सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने के भारत के फैसले का विरोध किया गया था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की वकालत करने वाले या तो पूर्व के अनुभवों को नजरअंदाज कर रहे हैं या फिर बार-बार एक ही तरीके से अलग परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख का भी उल्लेख किया कि आतंक और बातचीत, आतंक और व्यापार तथा पानी और खून साथ-साथ नहीं बह सकते।
सिंधु जल संधि के प्रावधानों का भी किया उल्लेख
क्वात्रा ने कहा कि भारत के खिलाफ युद्ध की धमकी देना पाकिस्तान की एक सामान्य नीति बन गई है, जिसका उद्देश्य अपनी आंतरिक समस्याओं से लोगों का ध्यान हटाना है। उन्होंने 1960 की सिंधु जल संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समझौते के तहत सिंधु बेसिन की छह प्रमुख नदियों को दो समूहों में बांटा गया था। भारत को तीन पूर्वी नदियों का नियंत्रण मिला, जिनमें बेसिन के पानी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बहता है, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियां मिलीं, जिनमें लगभग 80 प्रतिशत पानी प्रवाहित होता है।