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जयराम ठाकुर का आरोप, सीएम की घोषणाओं पर अब जनता को भरोसा नहीं, पिछले वादों का दें हिसाब

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 15 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

जयराम ठाकुर ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की घोषणाओं और वादों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं और जनता का भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने सरकार की कार्यशैली, कर्मचारियों से जुड़े फैसलों और कानून व्यवस्था के मामलों को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि सरकार को अपने पुराने वादों का हिसाब देना चाहिए।

शिमला

मुख्यमंत्री की घोषणाओं और वादों पर सवाल
शिमला में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की घोषणाओं और अब तक किए गए वादों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा की गई कई घोषणाएं अब तक धरातल पर लागू नहीं हुई हैं और जनता के बीच भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल नई घोषणाओं के माध्यम से समय निकालने का प्रयास कर रही है, जबकि पुराने वादों पर कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई दे रही है।

चुनिंदा क्षेत्रों में घोषणाओं को लेकर टिप्पणी
जयराम ठाकुर ने कहा कि चुनाव के दौरान पूरे प्रदेश के लिए गारंटियां दी गई थीं, लेकिन अब सरकार दूर-दराज और कम जनसंख्या वाले क्षेत्रों को चुनकर वहां नई घोषणाएं कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वादे पूरे राज्य के लिए थे तो अब केवल कुछ क्षेत्रों का नाम लेकर घोषणाएं क्यों की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लाहौल, पांगी, डोडरा-क्वार और किन्नौर जैसे क्षेत्रों में लगातार नई घोषणाएं की जा रही हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में स्थिति अलग है।

कर्मचारियों से जुड़े फैसलों पर प्रतिक्रिया
उन्होंने प्रथम और द्वितीय श्रेणी के कर्मचारियों की वेतन कटौती से जुड़े फैसले को वापस लेने पर कहा कि यह निर्णय शुरू से ही उचित नहीं था और उनकी पार्टी पहले दिन से इसका विरोध कर रही थी। इसके साथ ही उन्होंने बागी विधायकों की पेंशन से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रकार के निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्न खड़े होते हैं और कानूनी विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है।

सरकार की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया पर टिप्पणी
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा कई फैसले बिना पर्याप्त विचार और प्रक्रिया के लिए जा रहे हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार अदालतों में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और प्रशासनिक स्तर पर अस्थिरता की स्थिति बन रही है।

सरकाघाट मामले और कानून व्यवस्था पर प्रतिक्रिया
उन्होंने सरकाघाट में सामने आए एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सरकार को अधिक गंभीरता से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि माफिया गतिविधियों और आपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण की आवश्यकता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता सही दिशा में नहीं दिख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी करने के बजाय सरकार को अपनी जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।

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