पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने कांग्रेस सरकार की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों पर उठाए सवाल
Himachalnow / मंडी
पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ओपीएस का विरोध नहीं किया और भविष्य में भी नहीं करेंगे। उन्होंने प्रदेश सरकार की वर्तमान आर्थिक, प्रशासनिक और वित्तीय नीतियों पर गहन चिंता जताते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थिति पर ध्यानाकर्षण किया।
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ओपीएस और प्रशासनिक दृष्टिकोण
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा शासनकाल में उन्होंने ओपीएस से जुड़े मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने न कभी विरोध किया और न भविष्य में करेंगे। वर्तमान प्रदेश सरकार के निर्णयों में विरोधाभास स्पष्ट है, जैसे सुबह सेवा विस्तार न देने के आदेश और उसी दिन अधिकारियों को सेवा विस्तार मिल जाना। इससे यह पता चलता है कि प्रशासनिक तालमेल में कमी है।
आर्थिक और वित्तीय चुनौतियां
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों को यूपीएस की ओर भेज रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि 2027 में बड़े पैमाने पर सेवानिवृत्तियों के कारण प्रदेश पर आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की वित्तीय नीतियों को असफल बताते हुए कहा कि केवल सवा साल में 40 हजार करोड़ से अधिक कर्ज लेकर प्रदेश पर कुल 1.10 लाख करोड़ का बोझ डाला गया।
भ्रष्टाचार और चेस्टर हिल मामला
जयराम ठाकुर ने चेस्टर हिल मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें धारा 118 का उल्लंघन हुआ और यह बेनामी ट्रांजैक्शन का मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ अधिकारी ने पद का दुरुपयोग किया और मुख्यमंत्री को जानकारी होने के बावजूद इसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता और स्थिरता की आवश्यकता को दर्शाती है।
व्यवस्था परिवर्तन और प्रशासनिक असंगति
जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्य सचिव सेवा विस्तार न देने के आदेश देते हैं, जबकि उसी दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से एक अधिकारी को सेवा विस्तार मिल जाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विरोधाभास और असंगति से स्पष्ट है कि सरकार व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर केवल प्रशासनिक असंगति पैदा कर रही है।
अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रदेश हित में सरकार की भूमिका
पूर्व सीएम ने जोर देकर कहा कि वर्तमान सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों के हित में स्थायी और स्पष्ट नीतियां नहीं बना रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और वित्तीय नीतियों में असंगति प्रदेश की स्थिरता और विकास पर असर डाल रही है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट और संगठित नीति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।