आपदा प्रबंधन क्षमता सुदृढ़ीकरण को लेकर धर्मशाला में परामर्श बैठक आयोजित
हिमाचल प्रदेश आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजना के तहत धर्मशाला में विभिन्न विभागों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपदा प्रबंधन तंत्र को सुदृढ़ बनाने, डाटा साझा करने, संस्थागत समन्वय बढ़ाने और परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सुझाव लिए गए। अधिकारियों ने आगामी कार्ययोजना, तकनीकी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़ी आवश्यक तैयारियों पर भी चर्चा की।
धर्मशाला
आपदा प्रबंधन परियोजना पर हुई विस्तृत चर्चा
मिनी सचिवालय धर्मशाला में सोमवार को हिमाचल प्रदेश आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजना के अंतर्गत हितधारकों के साथ परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने की। बैठक में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों की संस्थागत और तकनीकी क्षमता को सुदृढ़ बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने परियोजना के उद्देश्यों, क्रियान्वयन की प्राथमिकताओं और जिला स्तर पर आवश्यक तैयारियों की समीक्षा भी की।
विभागों से मांगे गए सुझाव
बैठक में परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों से सुझाव और परामर्श प्राप्त किए गए। अधिकारियों ने उप-परियोजना के विभिन्न घटकों, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्यान्वयन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों तथा उनके समाधान पर विचार-विमर्श किया। आगामी कार्ययोजना तैयार करने के लिए विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता और जिम्मेदारियों के स्पष्ट निर्धारण पर भी चर्चा की गई। बैठक में यह भी कहा गया कि संबंधित विभाग अपने अनुभव और आवश्यकताओं के आधार पर सुझाव साझा करें, ताकि परियोजना को जिला स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
आधुनिक अवसंरचना विकसित करने पर बल
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि कांगड़ा जिला भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है, इसलिए यहां आपदा तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, प्रतिक्रिया, पुनर्वास और पुनर्निर्माण से संबंधित व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने आधुनिक आपदा प्रबंधन अवसंरचना विकसित करने, समन्वय और निर्णय-निर्माण प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा निगरानी एवं मूल्यांकन तंत्र को बेहतर बनाने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी संस्थाओं के बीच नियमित संवाद और तकनीकी क्षमता का विस्तार परियोजना की सफलता के लिए आवश्यक है।
डाटा साझा करने और समन्वय बढ़ाने के निर्देश
बैठक के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को अपने-अपने संकलित डाटा का परस्पर आदान-प्रदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने कहा कि डाटा साझा करने से आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के संचालन में सहायता मिलेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि विभागों के बीच समन्वय मजबूत होने से त्वरित निर्णय लेने में सुविधा होगी और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। बैठक में संचार व्यवस्था, सूचना प्रवाह और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को लेकर भी सुझाव रखे गए।
महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए सुविधाओं पर चर्चा
जेंडर एक्शन प्लान के तहत परियोजना में विकसित की जाने वाली सुविधाओं को महिलाओं और दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाने पर भी चर्चा की गई। बैठक में पृथक शौचालय, सुरक्षित पहुंच मार्ग, सुगम आवागमन व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास पर सुझाव दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि आपदा प्रबंधन से जुड़ी संरचनाओं और सेवाओं में समावेशी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, ताकि सभी वर्गों की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त शिल्पी बेक्टा, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा परियोजना से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित रहे।