कांगड़ा के गुजरेड़ा में राज्यपाल ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय का किया दौरा, शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कांगड़ा जिला के गुजरेड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का दौरा कर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, मूलभूत सुविधाओं तथा विद्यार्थियों के साथ उपलब्ध संसाधनों की स्थिति का जायजा लिया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अधिकारियों एवं शिक्षकों के साथ संवाद किया।
कांगड़ा
शैक्षणिक स्थिति और मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा
राज्यपाल ने विद्यालय परिसर का निरीक्षण करते हुए कक्षाओं की स्थिति, स्वच्छता व्यवस्था, डिजिटल शिक्षण संसाधनों तथा अन्य आधारभूत सुविधाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने अधिकारियों से दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में आने वाली प्रशासनिक एवं संसाधन संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदमों पर भी विचार-विमर्श किया।
विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद
निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उन्हें शिक्षा के प्रति समर्पण एवं आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने शिक्षकों से भी बातचीत करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की, विशेषकर उन शिक्षकों की जो दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उनके समर्पण से ही विद्यार्थियों का भविष्य सुदृढ़ होता है।
शिक्षा की गुणवत्ता और नीति पर विचार
राज्यपाल ने कहा कि बच्चे राष्ट्र का भविष्य हैं और उनके समुचित विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक परिस्थितियों के कारण उत्पन्न चुनौतियों को दूर कर प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शिक्षा पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI 2.0) और PGI-D 2024-25 का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर छठे स्थान और राज्यों की श्रेणी में तीसरे स्थान पर पहुंचा है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
शैक्षणिक सुधार और रणनीतिक प्रबंधन पर जोर
राज्यपाल ने अधिकारियों के साथ विद्यालयों के संसाधनों और मानव संसाधन के बेहतर उपयोग के लिए रणनीतिक समूह की अवधारणा पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्थाएं शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, प्रशासनिक दक्षता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों की उपस्थिति में समग्र शैक्षणिक सुधार की दिशा में निरंतर प्रयासों पर बल दिया।
