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मुख्यमंत्री ने कांगड़ा के नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को दिलाई शपथ, सुशासन पर दिया जोर

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों और उप-प्रधानों को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में पंचायतों की भूमिका, ग्रामीण विकास, नशा मुक्ति अभियान और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं पर भी चर्चा की गई।

धर्मशाला

नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को दिलाई शपथ

धर्मशाला के दाड़ी मैदान में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के नवनिर्वाचित पंचायत प्रधानों एवं उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाएं भारतीय लोकतंत्र की आधारभूत इकाइयों में शामिल हैं और ग्रामीण स्तर पर विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सरकार और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को प्राथमिकता देते हुए कार्य करना चाहिए। उन्होंने पंचायतों को स्थानीय विकास, सामाजिक समरसता और जनकल्याण कार्यक्रमों के संचालन का प्रमुख माध्यम बताया।

ग्राम विकास में पंचायतों की भूमिका पर दिया बल

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आजीविका से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पंचायतों को विकास कार्यों की निगरानी के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से कार्य करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन प्रावधानों ने स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया है तथा महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव निर्धारित समय पर संपन्न करवाए और निर्वाचित प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की गई है।

नशा मुक्त अभियान को मजबूत बनाने का आह्वान

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को नशे के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी को मजबूत करने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशे की समस्या से निपटने के लिए सरकार विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है और पंचायतों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 234 पंचायतों को चिट्टा प्रभावित श्रेणी में चिन्हित किया गया है, जहां विशेष निगरानी और जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से युवाओं को खेल, शिक्षा, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने तथा अपने क्षेत्रों में नशा विरोधी अभियान को मजबूत करने का आग्रह किया।

आत्मनिर्भर हिमाचल के लिए सरकार की प्राथमिकताएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और विकास परियोजनाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न परियोजनाओं और नीतिगत सुधारों के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व जुटाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने किशाऊ बांध परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत सरकार ने सिद्धांततः सहमति दी है कि परियोजना के जल घटक से लाभान्वित राज्य हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत वहन करेंगे। परियोजना के पूर्ण होने पर प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होने का अनुमान है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी और अन्य मामलों में प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया।

रोजगार, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की योजनाओं का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर कार्य कर रही है तथा शीघ्र ही पुलिस विभाग में 800 कांस्टेबल पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए बताया कि गाय के दूध का समर्थन मूल्य 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये तथा भैंस के दूध का समर्थन मूल्य 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है। प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कच्ची हल्दी पर 150 रुपये, गेहूं पर 80 रुपये और मक्का पर 50 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा शुरू की गई है तथा चरणबद्ध तरीके से राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। चयनित सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है और 5,400 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र में अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण के लिए 213.75 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इसके तहत एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल मैमोग्राफी जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में कृषि मंत्री चंद्र कुमार, आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा, सांसद अनुराग शर्मा, विधायक एवं एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली, विधायक एवं राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक संजय रतन, किशोरी लाल, कमलेश ठाकुर, मलेंद्र राजन और आशीष बुटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी) गोकुल बुटेल, स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, विभिन्न बोर्डों और निगमों के पदाधिकारी तथा प्रशासनिक अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। सचिव कृषि एवं पंचायती राज सी. पालरासू ने पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी, जबकि उपायुक्त हेमराज बैरवा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

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