जल शक्ति विभाग डिजिटल गवर्नेंस और ई-ऑफिस प्रणाली को देगा और मजबूती, 15 दिन में सभी सहायक अभियंता कार्यालय होंगे डिजिटल
हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग ने प्रशासनिक कार्यों में डिजिटल गवर्नेंस और ई-ऑफिस प्रणाली को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम तेज किए हैं। कसौली में आयोजित कार्यशाला में प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने सभी सहायक अभियंता कार्यालयों को 15 दिन के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के निर्देश दिए तथा पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित कार्यप्रणाली पर बल दिया।
कसौली
डिजिटल गवर्नेंस और अनुबंध प्रबंधन पर आयोजित हुई कार्यशाला
हिमाचल प्रदेश के जल शक्ति विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि प्रदेश सरकार पेयजल एवं सिंचाई योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में डिजिटल गवर्नेंस तथा ई-ऑफिस प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वह कसौली में ‘डिजिटल गवर्नेंस एवं अनुबंध प्रबंधन’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे थे। इस कार्यशाला का आयोजन जल शक्ति विभाग के शिमला जोन द्वारा किया गया, जिसमें विभाग के विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं ने भाग लिया।
डिजिटलीकरण से बढ़ेगी पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता
डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि सरकारी कार्यप्रणाली में डिजिटलीकरण केवल कार्यालयी प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, समयबद्ध कार्य निष्पादन, पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग प्रदेश में पेयजल एवं सिंचाई जैसी आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है और इसके लिए डिजिटल गवर्नेंस तथा प्रभावी अनुबंध प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना, अनुबंध प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करना, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना तथा पूरे विभाग में तकनीक आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देना है।
15 दिन में सहायक अभियंता कार्यालयों को डिजिटल करने के निर्देश
प्रधान सचिव ने बताया कि जल शक्ति विभाग ने प्रदेश के सभी अधिशाषी अभियंता कार्यालयों को सफलतापूर्वक ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया है और वर्तमान में प्रशासनिक कार्य, अनुबंध प्रबंधन तथा विभागीय संचार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग के सभी सहायक अभियंता कार्यालयों को भी 15 दिनों के भीतर ई-ऑफिस प्रणाली से जोड़ा जाए, ताकि विभागीय कार्यों में तेजी आए, जवाबदेही सुनिश्चित हो तथा आम नागरिकों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
जल संरक्षण और योजनाओं की निगरानी पर दिया विशेष जोर
डॉ. जैन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पेयजल और कृषि सिंचाई योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान करने से योजनाओं का बेहतर प्रबंधन संभव होगा। साथ ही उन्होंने पेयजल की सीमित उपलब्धता और बढ़ती मांग को देखते हुए दीर्घकालिक जल प्रबंधन योजना तैयार करने पर बल दिया। उन्होंने बावड़ी, तालाब, कुएं और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के निर्देश देते हुए कहा कि अधिकारियों को नियमित निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट ई-मेल के माध्यम से प्रस्तुत करनी चाहिए। इसके अलावा उपभोक्ताओं की शिकायतों का 10 दिनों के भीतर समाधान सुनिश्चित करने तथा ग्राम पंचायतों की बैठकों में विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए।
प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और कर्मचारियों को किया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान प्रधान सचिव ने कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले फील्ड कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय जल शक्ति आयोग, चंडीगढ़ के मुख्य अभियंता ए.के. गुप्ता तथा जल शक्ति विभाग शिमला क्षेत्र के मुख्य अभियंता मुकेश हीरा ने विभागीय योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी दी।
विशेषज्ञ अधिकारियों ने विभिन्न विषयों पर दिए प्रस्तुतीकरण
कार्यशाला में अधीक्षण अभियंता राजीव महाजन ने परियोजना वित्तपोषण एवं अवसंरचना पाइपलाइन विकास, संजीव सोनी ने प्रशासनिक पुनर्गठन एवं कार्यप्रवाह आधुनिकीकरण, विजय कश्यप ने पर्यावरणीय सुरक्षा एवं वन भूमि प्रशासन, होशियार सिंह ने अनुबंध प्रबंधन एवं परियोजना क्रियान्वयन, राजिंदर सिंह ने डिजिटल हस्तक्षेप के माध्यम से कार्यालयी आधुनिकीकरण तथा सुमित सूद ने रेडी-एचपी परियोजना पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यशाला में शिमला, सिरमौर, सोलन, किन्नौर और लाहौल-स्पीति क्षेत्रों के अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता तथा सहायक अभियंताओं ने भाग लिया।
