किशाऊ बांध परियोजना की लागत केंद्र वहन करेगा, तृप्ता ठाकुर ने समझौते का किया स्वागत
प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर ने किशाऊ बांध परियोजना की लागत केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने संबंधी समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश को वित्तीय राहत मिलने के साथ-साथ परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में भी प्रगति होगी।
शिमला
पत्रकार वार्ता में दी प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष तृप्ता ठाकुर ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य के बीच हुए समझौते पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि परियोजना लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन रही है और इससे जुड़े वित्तीय एवं प्रशासनिक पहलुओं पर लगातार चर्चा होती रही है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने परियोजना से संबंधित मुद्दों को केंद्र सरकार के समक्ष रखा, जिसके बाद लागत वहन से संबंधित सहमति बनी। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राज्य पर प्रस्तावित वित्तीय दायित्व कम होगा और परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
परियोजना से राजस्व प्राप्ति की संभावना
तृप्ता ठाकुर ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर यमुना नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना राज्य के लिए महत्वपूर्ण जल एवं ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध आकलनों के अनुसार परियोजना से हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त परियोजना से जल विद्युत उत्पादन, जल संसाधन प्रबंधन तथा संबंधित आधारभूत ढांचे के विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद राज्य को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं, जिससे विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।
पूर्व और वर्तमान सरकारों के रुख का किया उल्लेख
पत्रकार वार्ता के दौरान तृप्ता ठाकुर ने परियोजना को लेकर पूर्व और वर्तमान सरकारों के दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में परियोजना से संबंधित वित्तीय हिस्सेदारी और अन्य प्रशासनिक विषयों पर अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था। उनके अनुसार उस समय राज्य के हिस्से के रूप में लगभग 800 करोड़ रुपये के योगदान का विषय भी चर्चा में था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस मामले को केंद्र सरकार के साथ उठाया और परियोजना की वित्तीय संरचना पर पुनर्विचार के लिए प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान समझौता संभव हो सका।
महिला कांग्रेस ने जताया आभार
तृप्ता ठाकुर ने कहा कि महिला कांग्रेस इस समझौते का स्वागत करती है और इसे राज्य के विकास से जुड़ा विषय मानती है। उन्होंने कहा कि परियोजना के आगे बढ़ने से ऊर्जा, जल संसाधन और संबंधित क्षेत्रों में निवेश एवं विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना से संबंधित आगामी प्रक्रियाएं निर्धारित मानकों और समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ेंगी तथा राज्य को अपेक्षित लाभ प्राप्त होंगे।