शिमला में कमला नेहरू अस्पताल शिफ्टिंग प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक, सरकार से मांगा विस्तृत जवाब
कमला नेहरू अस्पताल को आईजीएमसी शिफ्ट करने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से शिफ्टिंग प्रस्ताव को लेकर विस्तृत जवाब मांगा है, जबकि डेंटल कॉलेज से जुड़े प्रस्ताव पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई है।
शिमला
कमला नेहरू अस्पताल शिफ्टिंग मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई
कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिफ्ट करने के प्रस्ताव को लेकर दायर जनहित याचिका पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। फालमा चौहान की ओर से दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने शिफ्टिंग प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
डेंटल कॉलेज के प्रस्ताव पर भी लगाई रोक
अदालत ने मामले से जुड़े डेंटल कॉलेज भवन के प्रस्ताव पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। राज्य सरकार ने हाल ही में कमला नेहरू अस्पताल की गायनी ओपीडी और कुछ अन्य सेवाओं को आईजीएमसी में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। सरकार का पक्ष था कि आईजीएमसी में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों को उपचार में सुविधा मिलेगी। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर विभिन्न संगठनों और स्थानीय स्तर पर आपत्तियां भी दर्ज की गई थीं।
याचिकाकर्ताओं ने मरीजों की सुविधा का मुद्दा उठाया
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि 102 वर्ष पुराना कमला नेहरू अस्पताल महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए महत्वपूर्ण संस्थान है। याचिका में तर्क दिया गया कि अस्पताल की सेवाओं को स्थानांतरित करने से दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को असुविधा हो सकती है। अदालत ने स्वास्थ्य विभाग से यह भी पूछा कि शिफ्टिंग प्रस्ताव किन आधारों पर तैयार किया गया और इससे मरीजों को क्या लाभ या प्रभाव पड़ेगा।
प्रदेश में विभिन्न स्तरों पर हुआ था विरोध
कमला नेहरू अस्पताल की सेवाओं को शिफ्ट करने के प्रस्ताव को लेकर शिमला सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई संगठनों ने विरोध दर्ज किया था। महिला संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और कुछ राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां रखी थीं। इसके बाद मामले को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी।
महिला संगठनों ने फैसले पर दी प्रतिक्रिया
आखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव फालमा चौहान ने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा शिफ्टिंग प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय महिलाओं और मरीजों के हितों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि संगठन की ओर से मामले को लेकर न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग की ओर से मामले में आगामी सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है।
कमला नेहरू अस्पताल की सेवाओं का महत्व
कमला नेहरू अस्पताल शिमला का प्रमुख महिला एवं प्रसूति रोग अस्पताल माना जाता है, जहां प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अस्पताल की शिफ्टिंग प्रक्रिया पर रोक रहेगी। मामले की अगली सुनवाई में अदालत आगे की प्रक्रिया पर निर्णय लेगी।
