Himachalnow / शिमला
शिमला: हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, हाई-एंड कैफे विवाद पर अगली सुनवाई 17 दिसंबर को
स्टेट हेरिटेज एडवाइजरी कमेटी से रिपोर्ट तलब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला के ऐतिहासिक टाउन हॉल में ‘हाई एंड’ नाम से कैफे खोलने के मामले में स्टेट हेरिटेज एडवाइजरी कमेटी से रिपोर्ट मांगी है। यह रिपोर्ट एडवोकेट जनरल ऑफिस के माध्यम से जमा करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को निर्धारित की गई है।
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जनवरी से फूड कोर्ट संचालन पर रोक
हाईकोर्ट ने इसी साल जनवरी में टाउन हॉल में फूड कोर्ट संचालन पर रोक लगाई थी। फूड कोर्ट चलाने वाली कंपनी देवयानी इंटरनेशनल को आदेश दिया गया था कि वह अगली सुनवाई तक इसका संचालन बंद रखे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की खंडपीठ अब 17 दिसंबर को मामले की सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: विरासत स्थल का महत्व
हाईकोर्ट ने टाउन हॉल को शिमला का एक प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक स्थल बताया। अदालत ने कहा कि यह विरासत भवन हाल ही में एशियन विकास बैंक के सहयोग से पुनर्निर्मित किया गया है। हेरिटेज भवन एक खजाना है, जो प्राचीन युग का साक्षी है और इसे सार्वजनिक ट्रस्ट माना जाना चाहिए।
विरासत स्थल पर दबाव का खतरा
हाईकोर्ट ने चिंता जताई कि इस ऐतिहासिक भवन में फूड कोर्ट चलाने से इसकी संरचना पर दबाव बढ़ेगा, जो इसके विरासत मूल्य के लिए खतरा हो सकता है। अदालत ने कहा, “इमारत को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है, और इसलिए इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना अनिवार्य है।”
जनहित को प्राथमिकता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित निजी हित से अधिक महत्वपूर्ण है। नगर निगम शिमला के कमिश्नर को इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
खंडपीठ ने जताया खेद
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने खेद व्यक्त किया कि मामले की लगातार दो दिन सुनवाई के बावजूद, राज्य सरकार, नगर निगम और एचपी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बैंक ने कई अहम सवालों का उत्तर नहीं दिया। अदालत ने राज्य विरासत सलाहकार समिति को इस मामले के सभी पहलुओं पर गौर करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि: याचिका और आरोप
जनहित याचिका का दावा
यह मामला एडवोकेट अभिमन्यु राठौर द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका में कहा गया है कि शिमला नगर निगम ने प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का उल्लंघन करते हुए इस विरासत संपत्ति को हाई-एंड कैफे में बदलने की अनुमति दी।
फूड कोर्ट से भवन को नुकसान का अंदेशा
याचिका में दावा किया गया है कि फूड कोर्ट चलाने से भवन को भारी नुकसान होगा। अदालत ने पहले ही स्पष्ट किया था कि इस इमारत में फूड कोर्ट जैसी गतिविधियां उचित नहीं हैं।
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार से दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने का आग्रह किया। याचिका में कहा गया कि इन अधिकारियों ने अनधिकृत आंतरिक निर्माण और संशोधन की निगरानी में विफलता दिखाई, जिससे इस विरासत भवन की मूल प्रकृति प्रभावित हुई।
अगली सुनवाई 17 दिसंबर को
इस मामले पर अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी, जहां स्टेट हेरिटेज एडवाइजरी कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा की जाएगी।
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