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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जीवाश्म खनन और व्यापार पर लगाई रोक

हिमाचलनाउ डेस्क | 12 दिसंबर 2024 at 9:36 am

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कोर्ट का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के किसी भी क्षेत्र से जीवाश्म के खनन और व्यापार पर रोक लगा दी है। यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सत्येन वैद्य की खंडपीठ ने दिया। अदालत ने स्पीति क्षेत्र के लांग्जा गांव समेत राज्य के अन्य हिस्सों में जीवाश्म निकालने, इकट्ठा करने और व्यापार करने पर पूरी तरह से रोक लगाई है।

कोर्ट ने प्रशासन को दिए आदेश
अदालत ने मुख्य सचिव, उपायुक्त लाहौल-स्पीति और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन क्षेत्रों में जीवाश्म संबंधित किसी भी गतिविधि की अनुमति न दें। इसके साथ ही, कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर प्रतिवादियों को जवाब दायर करने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई 31 दिसंबर को होगी।


जनहित याचिका के आधार पर कोर्ट का संज्ञान

याचिका और इसके आधार
यह आदेश अधिवक्ता पूनम गहलोत द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर दिया गया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से अपील की थी कि स्पीति घाटी, जो समृद्ध जीवाश्म भंडारों के लिए प्रसिद्ध है, वहां की जीवाश्म संपत्ति का अवैध खनन और व्यापार रोकने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि स्पीति घाटी में अम्मोनाइट्स, ब्राचिओपोड्स, बाइवाल्व्स और कोरल जैसे महत्वपूर्ण समुद्री जीवाश्म पाए जाते हैं, जो प्राचीन समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों और जैव विविधता के महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।

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स्पीति घाटी का ऐतिहासिक महत्व
स्पीति घाटी में पाए गए जीवाश्म टेथिस सागर के अवशेष हैं, जो एक प्राचीन महासागर था। यह महासागर कभी भूमध्य सागर से लेकर हिंद महासागर तक फैला था और मेसोजोइक युग के दौरान एक महत्वपूर्ण समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र था। यह जीवाश्म अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हिमालय के उदय से पहले समुद्री जीवन के विकास के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।


यूनेस्को के विश्व धरोहर समझौते का संदर्भ

विश्व धरोहर संरक्षण का महत्व
अधिवक्ता ने याचिका में यह भी बताया कि 16 नवंबर 1972 को यूनेस्को के महाधिवेशन द्वारा विश्व धरोहर कन्वेंशन को अपनाया गया था। इस कन्वेंशन का उद्देश्य प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और सुरक्षा करना है। इस कन्वेंशन के तहत विश्व धरोहर स्थलों की सूची बनाई गई, जिसमें ऐसे स्थल शामिल किए जाते हैं, जिनका वैश्विक महत्व होता है।

लांग्जा और आसपास के गांवों में जीवाश्म का दोहन
अधिवक्ता ने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया कि लांग्जा और उसके आसपास के गांवों में जीवाश्मों का अवैध खनन और व्यापार हो रहा है, जिससे इस महत्वपूर्ण धरोहर को नुकसान पहुंच रहा है। इसलिए, इस मामले में उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की अपील की गई थी।


निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का यह आदेश प्रदेश के ऐतिहासिक और पर्यावरणीय धरोहर की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है। कोर्ट ने स्पीति घाटी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में जीवाश्म के खनन और व्यापार पर रोक लगाकर इन क्षेत्रीय धरोहरों के संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम बढ़ाया है। इस फैसले से उम्मीद जताई जा रही है कि राज्य में जीवाश्मों की अवैध खुदाई पर काबू पाया जा सकेगा और इन प्राचीन धरोहरों का संरक्षण किया जाएगा।

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