शिमला के रामपुर में लुहरी जल विद्युत परियोजना को लेकर प्रभावितों का विरोध प्रदर्शन
Himachalnow / शिमला
प्रशासन से वादा टूटने का आरोप
शिमला के रामपुर में लुहरी जल विद्युत परियोजना के निर्माण को लेकर प्रभावितों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रभावितों का आरोप है कि प्रशासन के साथ किए गए समझौते के मुताबिक उनकी मांगें पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे और परियोजना के निर्माण कार्य को पूरी तरह से रोक देंगे।
पिछला आंदोलन और प्रशासन की वादाखिलाफी
प्रभावितों ने बताया कि पहले भी किसानों ने इस परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और एक समझौता हुआ। इस समझौते में प्रशासन ने उनकी मांगों को पूरा करने का वादा किया था, लेकिन अब प्रशासन अपनी बात से मुकर रहा है। अब प्रभावितों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया, तो अगला प्रदर्शन और भी बड़े पैमाने पर होगा, और परियोजना के कार्य को पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।
मुख्य मांगें
1. फसल का नुकसान और मुआवजा
प्रभावितों की सबसे पहली मांग है कि परियोजना के निर्माण के कारण जो धूल उड़ी, उससे उनकी फसलें बर्बाद हो गईं। वे चाहते हैं कि इस नुकसान का मुआवजा उन्हें दिया जाए।
2. मकानों में दरारें और मुआवजा
परियोजना के निर्माण से प्रभावित क्षेत्र के कई मकानों में दरारें आ गई हैं। प्रभावितों का कहना है कि इन मकानों का सर्वे किया जाए और उसके बाद मुआवजा दिया जाए।
3. 2011 की नीति में बदलाव
प्रभावितों का कहना है कि 2011 की नीति के तहत 900 मीटर के दायरे में बदलाव किया जाए, ताकि वे अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें।
मुख्यमंत्री से बैठक की मांग
प्रभावितों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री से मिलने की मांग की गई थी, ताकि इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया जा सके और समाधान निकल सके। उनका कहना है कि यदि सरकार, प्रशासन और सतलू जल विद्युत निगम उनके मुद्दों पर ध्यान नहीं देते हैं, तो वे और भी तेज आंदोलन करेंगे।
भविष्य में आंदोलन की चेतावनी
प्रभावितों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन और सरकार ने समय रहते उनकी मांगों पर गौर नहीं किया, तो आने वाले समय में आंदोलन और भी तेज किया जाएगा। वे यह सुनिश्चित करेंगे कि उनकी आवाज़ को सुना जाए और उनकी मांगों को पूरा किया जाए।
रामपुर में लुहरी जल विद्युत परियोजना से जुड़े प्रभावितों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द प्रभावितों की मांगों का समाधान करें ताकि स्थिति बिगड़ने से पहले इस मुद्दे का हल निकाला जा सके।