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स्टाफ नर्स आत्महत्या मामले में आरोपी पति को सशर्त जमानत, अदालत ने तय की कई शर्तें

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

मंडी की सत्र अदालत ने स्टाफ नर्स आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपी और मृतका के पति की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए सशर्त रिहाई के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने जांच में सहयोग, गवाहों को प्रभावित न करने और प्रत्येक सुनवाई में उपस्थित रहने सहित कई शर्तें निर्धारित की हैं।

मंडी

अदालत ने आरोपी को दी सशर्त जमानत

मंडी जिले के बल्ह थाना क्षेत्र के रठोहा गांव में 3 जून 2026 को दर्ज स्टाफ नर्स आत्महत्या मामले में मंडी की सत्र अदालत ने मुख्य आरोपी एवं मृतका के पति अमित कुमार की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। अदालत ने आरोपी को 1 लाख रुपये के निजी मुचलके तथा 1 लाख रुपये की जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि आरोपी को निर्धारित सभी शर्तों का पालन करना होगा।

3 जून को दर्ज हुआ था मामला

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 3 जून 2026 को बल्ह थाना क्षेत्र की गागल पुलिस चौकी में दर्ज मामले में बताया गया था कि सोलन जिले के दालड़ाघाट में 108 एम्बुलेंस सेवा में कार्यरत स्टाफ नर्स कुषमा देवी अपने ससुराल रठोहा में मृत अवस्था में मिली थीं। मामले में मृतका के भाई रविकांत की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। शिकायत में पति, सास और ननद पर प्रताड़ना के आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की जांच पुलिस द्वारा नियमानुसार की जा रही है।

जमानत के साथ लगाई गईं कई शर्तें

अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए कई शर्तें भी निर्धारित की हैं। आदेश के अनुसार आरोपी को अपना मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, ई-मेल आईडी और सोशल मीडिया खातों की जानकारी पुलिस और न्यायालय को उपलब्ध करानी होगी। इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन होने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचित करना होगा। इसके अतिरिक्त आरोपी को जांच के दौरान पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर पूरा सहयोग करना होगा।

गवाहों को प्रभावित नहीं करने के निर्देश

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए हैं कि आरोपी अभियोजन पक्ष के गवाहों को किसी भी प्रकार से प्रभावित करने या उन पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं करेगा। साथ ही मुकदमे की प्रत्येक निर्धारित सुनवाई पर अदालत में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया जाता है, तो अभियोजन पक्ष जमानत निरस्त करने के लिए न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत कर सकता है।