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हरिद्वार / मौनी अमावस्या 50 वर्षों बाद बना दुर्लभ त्रिवेणी योग, हरिद्वार में उमड़ा आस्था का सैलाब

हिमाचलनाउ डेस्क • 29 Jan 2025 • 1 Min Read

माघ कृष्ण अमावस्या को मौनी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मौन रहकर स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस बार 50 वर्षों बाद मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग बन रहा है, जो इसे और भी खास बनाता है।


मौनी अमावस्या का महत्व

👉 मौनी अमावस्या का नाम “मुनि” शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है ध्यान और मौन
👉 इस दिन पवित्र नदी में स्नान, दान और तप करने से पितर प्रसन्न होते हैं
👉 कहा जाता है कि मौनी अमावस्या के दिन ही ऋषि मनु का जन्म हुआ था


50 वर्षों बाद बना विशेष योग

इस बार मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी योग के साथ चार अन्य शुभ योग भी बन रहे हैं:

1️⃣ त्रिवेणी योग: मकर राशि में सूर्य, चंद्रमा और बुध के संचार से बन रहा है।
2️⃣ बुध आदित्य योग: बुद्धि और ज्ञान को बल देने वाला शुभ योग।
3️⃣ मालव्य योग: सौभाग्य और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला योग।
4️⃣ शशराज योग: राजयोग में शामिल, सफलता और यश दिलाने वाला योग।
5️⃣ सर्वार्थ सिद्धि योग: सभी कार्यों में सफलता दिलाने वाला योग।

👉 गंगा स्नान करने से त्रिवेणी यानी संगम स्नान का पुण्य फल प्राप्त होता है।


हरिद्वार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर हरिद्वार के हर की पैड़ी घाट सहित अन्य घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

🔹 सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु जयकारों के साथ घाटों पर पहुंचे
🔹 स्नान और दान-पुण्य के बाद भक्तिमय माहौल में दिन की शुरुआत हुई।
🔹 शिवालयों और शक्तिपीठों में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
🔹 प्रयागराज में महाकुंभ होने के बावजूद कई राज्यों के श्रद्धालु हरिद्वार में स्नान के लिए पहुंचे


सुरक्षा और यातायात व्यवस्था

स्नान पर्व को देखते हुए पुलिस ने विशेष यातायात प्लान जारी किया है:

🚫 सुबह 6 बजे से स्नान संपन्न होने तक भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा
🚧 चंडी चौक से वाल्मीकि चौक, शिवमूर्ति चौक और भीमगोड़ा बैरियर तक ‘जीरो जोन’ घोषित किया गया है।


मौनी अमावस्या पर पूजा-पाठ का महत्व

🔸 यह दिन भगवान विष्णु और पितरों को समर्पित है।
🔸 स्नान के बाद भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा करने का विशेष महत्व है।
🔸 दान-पुण्य और जप-तप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है


मौनी अमावस्या 2025 एक अत्यंत दुर्लभ संयोग लेकर आई है, जिसमें त्रिवेणी योग सहित पांच शुभ योग बन रहे हैं। इस अवसर पर हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहापवित्र स्नान, दान और तप से यह दिन मोक्ष प्राप्ति और पुण्य अर्जित करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है