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6 जून से शुरू हो रहा मृत्यु पंचक! पंडित अर्चित शर्मा ने बताई 5 दिन की बड़ी सावधानियां

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 3 Hours Ago • 1 Min Read

जून माह में एक बार फिर मृत्यु पंचक का दौर शुरू होने जा रहा है, जो 6 जून 2026 की शाम से 11 जून 2026 की सुबह तक रहेगा। पंडित अर्चित शर्मा के अनुसार इस अवधि में कुछ कार्यों से बचने और धार्मिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने श्रद्धा, संयम, सेवा और सत्कर्म को इस समय का सबसे महत्वपूर्ण संदेश बताया है।

हरिद्वार

जून माह में एक बार फिर मृत्यु पंचक का दौर शुरू होने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 6 जून 2026 शनिवार की शाम 7 बजकर 03 मिनट से मृत्यु पंचक प्रारंभ होगा, जो 11 जून 2026 गुरुवार सुबह 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। शनिवार से पंचक आरंभ होने के कारण इसे मृत्यु पंचक माना जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इसे विशेष सावधानी रखने वाला समय बताया गया है।हरिद्वार के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अर्चित शर्मा ने बताया कि पंचक के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन पांच दिनों में नए शुभ कार्यों की शुरुआत टालना उचित माना जाता है।

पंडित अर्चित शर्मा के अनुसार मृत्यु पंचक के दौरान चारपाई, पलंग या लकड़ी का नया फर्नीचर खरीदना अथवा बनवाना शुभ नहीं माना जाता। घर निर्माण के लिए लकड़ी एकत्र करना, घर में छत डालना तथा लकड़ी से जुड़े बड़े कार्य भी इस अवधि में नहीं करने चाहिए। इसके अलावा दक्षिण दिशा की यात्रा करने से भी बचने की सलाह दी जाती है।उन्होंने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि मृत्यु पंचक के दौरान किसी व्यक्ति का निधन हो जाए तो अंतिम संस्कार विशेष विधि-विधान के साथ किया जाता है। कई परंपराओं में पांच प्रतीकात्मक पुतलों का दहन करने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया संपन्न की जाती है। हालांकि यह परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में भिन्न हो सकती है।

पंडित अर्चित शर्मा ने कहा कि मृत्यु पंचक के दौरान भय या भ्रम की स्थिति बनाने की आवश्यकता नहीं है। यह समय आत्मचिंतन, धार्मिक साधना और पुण्य कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने लोगों से जरूरतमंदों की सहायता करने, दान-पुण्य करने तथा धार्मिक कार्यों में भाग लेने की अपील की।

उन्होंने बताया कि शनिदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए इस अवधि में शनिदेव के मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धालु प्रतिदिन श्रद्धा भाव से इस मंत्र का जाप कर सकते हैं—
“ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः”

पंडित अर्चित शर्मा के अनुसार श्रद्धा, संयम, सेवा और सत्कर्म किसी भी कठिन समय को सकारात्मक ऊर्जा में बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि मृत्यु पंचक को अंधविश्वास के रूप में नहीं बल्कि सनातन परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं के दृष्टिकोण से समझना चाहिए तथा धार्मिक नियमों का पालन करते हुए समाज सेवा और पुण्य कार्यों में भाग लेना चाहिए।

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