व्यवस्था परिवर्तन के दावों पर सवाल, नाहन मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल
Himachalnow / नाहन
प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के दावों के बीच जिला सिरमौर का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज खुद अव्यवस्थाओं से जूझता नजर आ रहा है। मेडिकल कॉलेज में स्थिति इस कदर खराब हो चुकी है कि यहां एक भी सीनियर रेजिडेंट कार्यरत नहीं है। प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों की ओपीडी वाले इस संस्थान में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
नाहन
प्रदेश सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के दावों के बीच जिला सिरमौर का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान डॉ. यशवंत सिंह परमार मेडिकल कॉलेज खुद अव्यवस्थाओं से जूझता नजर आ रहा है। हालात ऐसे हैं कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर संकट में डाल दिया है।मेडिकल कॉलेज में स्थिति इस कदर खराब हो चुकी है कि यहां एक भी सीनियर रेजिडेंट कार्यरत नहीं है। प्रतिदिन करीब 1200 मरीजों की ओपीडी वाले इस संस्थान में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
मेडिसिन विभाग में एक महिला चिकित्सक के भरोसे ही ओपीडी और वार्ड की व्यवस्था चल रही है। सुबह से लेकर दोपहर तक लगातार मरीजों की भीड़ के बीच उन्हें काम संभालना पड़ रहा है, जबकि अन्य चिकित्सकों की गैरमौजूदगी लोगों के बीच सवाल खड़े कर रही है।दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए हालात और भी मुश्किल हैं। ओपीडी में भारी भीड़ के चलते कई मरीजों का नंबर तक नहीं आ पाता, जिससे उन्हें पर्ची हाथ में लिए अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है। कई मरीजों को अस्पताल परिसर में ही रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदहाल स्थिति ने सरकार के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों में लगातार बढ़ते आक्रोश के बीच यह मुद्दा अब बड़ा जनसरोकार बनता जा रहा है।अस्पताल प्रशासन का कहना है कि स्टाफ की कमी को लेकर सरकार को बार-बार अवगत कराया गया है। प्रिंसिपल संगीता ढिल्लो के अनुसार संस्थान में सीनियर रेजिडेंट के पद खाली हैं और भर्ती प्रक्रिया सरकार के स्तर पर ही पूरी की जानी है।
