नाहन नगर परिषद चुनाव में सियासी सूरमाओं की अग्निपरीक्षा
Himachalnow / नाहन
नाहन नगर परिषद चुनाव इस बार केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति के बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा और राजनीतिक वजूद की सीधी परीक्षा बन चुका है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, सांसद सुरेश कश्यप और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाने वाले विधायक अजय सोलंकी की राजनीतिक ताकत अब वार्ड-वार्ड में परखी जा रही है।
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नाहन नगर परिषद चुनाव इस बार केवल स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति के बड़े चेहरों की प्रतिष्ठा और राजनीतिक वजूद की सीधी परीक्षा बन चुका है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, सांसद सुरेश कश्यप और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी माने जाने वाले विधायक अजय सोलंकी की राजनीतिक ताकत अब वार्ड-वार्ड में परखी जा रही है।शहर के कई वार्ड इस बार साधारण चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के केंद्र बन गए हैं। प्रत्याशी भले स्थानीय हों, लेकिन असली लड़ाई बड़े नेताओं की साख और प्रभाव की मानी जा रही है।
सबसे चर्चित वार्ड नंबर-2 बना हुआ है, जो सांसद सुरेश कश्यप का गृह वार्ड माना जाता है। यहां भाजपा समर्थित प्रत्याशी मनीष जैन मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से नरेंद्र तोमर चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्हें विधायक अजय सोलंकी का बेहद करीबी माना जाता है। ऐसे में यह मुकाबला सीधे सांसद बनाम विधायक की प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल गया है।वार्ड नंबर-1 ने भी राजनीतिक पारा चढ़ा रखा है। वर्षों तक भाजपा का गढ़ रहे इस वार्ड में इस बार भाजपा ने शुभम सैनी और कांग्रेस ने कपिल गर्ग उर्फ मोंटी को मैदान में उतारा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही प्रत्याशी वार्ड के स्थायी निवासी नहीं हैं। शहर में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है कि दोनों दलों को इस वार्ड में स्थानीय मजबूत चेहरा तक नहीं मिल पाया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल के प्रभाव वाले वार्ड नंबर-5 में भी मुकाबला बेहद प्रतिष्ठापूर्ण हो गया है। भाजपा ने यहां पूर्व पार्षद मधु अत्री की पुत्रवधू सीमा अत्री को टिकट दिया है, जबकि कांग्रेस ने पहली बार सबीना पर दांव खेला है। इस वार्ड को सीधे तौर पर डॉ. बिंदल की राजनीतिक पकड़ का पैमाना माना जा रहा है।वार्ड नंबर-6 में कांग्रेस का सबसे मजबूत चेहरा योगेश गुप्ता उर्फ सुख्खू भाई माने जा रहे हैं। शहर की राजनीति में उनकी पकड़ इतनी मजबूत मानी जाती है कि विरोधी भी उन्हें हल्के में लेने को तैयार नहीं हैं। भाजपा ने यहां पूर्व मंत्री श्याम शर्मा के परिवार से जुड़े चेहरे को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प जरूर बनाया है।
विधायक अजय सोलंकी के प्रभाव वाले वार्ड नंबर-9 में भी प्रतिष्ठा की जंग देखने को मिल रही है। भाजपा ने कौशल्या देवी और कांग्रेस ने कुसुम तोमर को मैदान में उतारा है। दोनों चेहरे भले शहर की मुख्य राजनीति में ज्यादा चर्चित न हों, लेकिन इस वार्ड का परिणाम सीधे विधायक की पकड़ से जोड़कर देखा जा रहा है।वार्ड नंबर-12 में कांग्रेस ने पहली बार राकेश चन्ना पर दांव खेलकर युवा वोट बैंक और सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की है। भाजपा ने यहां पूर्व पार्षद प्रदीप सहोत्रा को मैदान में उतारा है। राकेश चन्ना की मिलनसार और सामाजिक छवि को कांग्रेस बड़ा हथियार मान रही है।
वहीं वार्ड नंबर-7 को लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तक शुरू हो गई है कि भाजपा ने यह सीट लगभग कांग्रेस के लिए खुली छोड़ दी है। लगातार मजबूत पकड़ बनाए हुए राकेश गर्ग उर्फ पपली के सामने भाजपा ने पहली बार अभिषेक चौधरी को उतारा है। फिलहाल यहां कांग्रेस का पलड़ा भारी माना जा रहा है।वार्ड नंबर-4 भी इस चुनाव में खास चर्चा में है। यह क्षेत्र पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष स्वर्गीय रेखा तोमर का वार्ड माना जाता रहा है। भाजपा ने उनकी पुत्रवधू पूजा तोमर उर्फ मोना को मैदान में उतारा है। समाजसेवा और लोगों के बीच सक्रियता के कारण उन्हें मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस ने यहां श्रद्धा शर्मा को मौका दिया है, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा समर्थित नगर परिषद होने के बावजूद शहर के कई वार्डों में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर जनता में नाराजगी है। कांग्रेस इसी मुद्दे को चुनाव में सबसे बड़ा हथियार बनाकर भाजपा को घेर रही है।अब पूरा चुनाव इस सवाल पर टिक गया है कि क्या डॉ. राजीव बिंदल की चुनावी रणनीति और भाजपा का संगठनात्मक नेटवर्क फिर नगर परिषद पर कब्जा बरकरार रख पाएगा, या फिर विधायक अजय सोलंकी अपनी जमीनी पकड़ और मुख्यमंत्री से नजदीकियों के दम पर भाजपा के गढ़ में सेंध लगाने में सफल होंगे।नाहन नगर परिषद का यह चुनाव अब सिर्फ वार्डों की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति के दो बड़े ध्रुवों के बीच शक्ति, रणनीति और प्रतिष्ठा का सीधा मुकाबला बन चुका है।