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Navratri 2022: नवरात्रि में प्याज-लहसुन खाना क्यों है वर्जित? यह है कारण

SAPNA THAKUR | 22 सितंबर 2022 at 10:43 am

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HNN/ नाहन

इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 26 सितंबर से हो रही है, जो कि 05 अक्टूबर तक रहेगी। नवरात्रि के पूरे नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। अपनी श्रद्धा और शक्ति के अनुसार कुछ लोग पूरे नौ दिन, तो कुछ लोग पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं। बता दें, नवरात्रि के व्रत के दौरान कई नियमों का पालन भक्तों को करना होता है।

ऐसा ही एक नियम नवरात्रि के दौरान भोजन को लेकर भी है। व्रत के दौरान सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है जिसमें अनाज, फलाहार शामिल होते हैं। जो लोग व्रत नहीं रखते हैं वे लोग भी सात्विक भोजन ही ग्रहण करते हैं। भोजन में नौ दिनों तक लहसुन-प्याज का सेवन करना वर्जित माना जाता है। लेकिन कई लोग नहीं जानते हैं कि नवरात्रि में लहसुन-प्याज खाने की मनाही क्यों है, इसके कई कारण है।

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प्याज-लहसुन खाना इसलिए है वर्जित
नवरात्रि के नौ दिनों में लहसुन और प्याज का सेवन करना वर्जित होता है, क्योंकि लहसुन और प्याज को तामसिक प्रकृति का भोज्य पदार्थ माना जाता है। शास्त्रों के मुताबिक, इसके सेवन से अज्ञानता और वासना में बढ़ोतरी होती है। साथ ही ये भी कहा जाता है कि लहसुन और प्याज जमीन के नीचे उगते हैं। इनकी सफाई में कई सूक्ष्म जीवों की मृत्यु हो जाती है, ऐसे में इन्हें उपवास या शुभ कार्य के दौरान खाना अशुभ माना गया है।

एक पौराणिक कथा भी है प्रचलित
लहसुन और प्याज को न खाने को लेकर एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। कथा के अनुसार, स्वरभानु नाम का दैत्य था, जिसने समुद्र मंथन के बाद देवताओं के बीच बैठकर छल से अमृत पी लिया था। ये बात जब मोहिनी रूप धारण किए भगवान विष्णु को पता चली, तो उन्होंने अपने चक्र से स्वरभानु का सिर धड़ से अलग कर दिया। स्वरभानु के सिर और धड़ को ही राहु और केतु कहा जाता है।

कहा जाता है कि सिर कटने के बाद स्वरभानु के सिर और धड़ से अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरीं, जिनसे लहसुन और प्याज की उत्पत्ति हुई। चूंकि, लहसुन और प्याज की उत्पत्ति अमृत की बूंदों से हुई है, इसलिए रोगों को दूर करने में ये दोनों ही कारगर साबित होते हैं। लेकिन इनकी उत्पत्ति राक्षस के मुंह से हुई, इसलिए इसे अपवित्र माना गया है। यही वजह है कि पूजा में भी कभी भगवान को लहसुन और प्याज का भोग नहीं लगाया जाता है।

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