हमीरपुर के नेरी में स्थापित होगा देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र, 28,800 कार्बन क्रेडिट मिलने का अनुमान
हमीरपुर जिले के नेरी में स्थापित किए जा रहे स्वदेशी बायोचार संयंत्र की प्रगति की मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने समीक्षा की। सरकार के अनुसार परियोजना से कार्बन क्रेडिट, वन संसाधनों के प्रबंधन, कृषि क्षेत्र और स्थानीय रोजगार से जुड़े कई उद्देश्यों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
हमीरपुर
नेरी और जाहू परियोजनाओं की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में स्थापित किए जा रहे बायोचार संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण के साथ वन संसाधनों के सतत प्रबंधन, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों के सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहयोग देने की दिशा में कार्य करेगी।
बायोमास से होगा बायोचार का उत्पादन
मुख्यमंत्री ने बताया कि परियोजना के तहत चीड़ की पत्तियां (पाइन नीडल्स), लैंटाना, बांस तथा अन्य वृक्ष एवं पौध-आधारित बायोमास का उपयोग कर बायोचार तैयार किया जाएगा। इसके लिए एकत्रित बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता मानकों का पालन करने वाले आपूर्तिकर्ताओं को प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि परियोजना की 10 वर्ष की परिचालन अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट प्राप्त हो सकते हैं।
त्रिपक्षीय समझौते के तहत संचालित हो रही परियोजना
मुख्यमंत्री ने बताया कि हमीरपुर के नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, वन विभाग तथा प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के बीच त्रिपक्षीय समझौता किया गया था। उन्होंने कहा कि यह परियोजना हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के तहत संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से कृषि प्रणालियों में वृक्षों के समावेश को बढ़ावा दिया जाएगा।
किसानों और पर्यावरण दोनों को होगा लाभ
मुख्यमंत्री के अनुसार यह कार्यक्रम जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रभावों के प्रबंधन में सहयोग देने के साथ किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि कृषि एवं वानिकी आधारित गतिविधियों के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कार्बन उत्सर्जन प्रबंधन में रहेगा योगदान
मुख्यमंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश के लगभग 50,000 हेक्टेयर पात्र कृषि क्षेत्र में लागू होने वाला यह कार्यक्रम करीब 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान देगा। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा तथा कार्बन अवशोषण से जुड़े लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा। कार्यक्रम के संचालन और निगरानी के लिए जीआईएस, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार मानकों के अनुरूप किया जाएगा।