आउटसोर्स कंप्यूटर शिक्षकों को बड़ा झटका, नियमितीकरण पर फिर अटकी प्रक्रिया
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत आउटसोर्स कंप्यूटर शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया फिलहाल आउटसोर्स नीति के कारण आगे नहीं बढ़ सकी है। शिक्षा विभाग ने इस मामले में विधि विभाग, कार्मिक विभाग और प्रदेश सरकार से कानूनी व प्रशासनिक राय मांगी है। अब नियमितीकरण को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित विभागों की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
शिमला
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्षों से आउटसोर्स आधार पर सेवाएं दे रहे कंप्यूटर शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग की ओर से एलडीआर (लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट) के माध्यम से इन शिक्षकों को शिक्षा विभाग में नियमित करने की प्रक्रिया फिलहाल आउटसोर्स नीति के कारण उलझ गई है। विभाग ने इस मामले में विधि विभाग, कार्मिक विभाग और प्रदेश सरकार से विस्तृत राय मांगी है।जानकारी के अनुसार, हाई कोर्ट के निर्देशों और शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया था कि एसएमसी शिक्षकों की तर्ज पर कंप्यूटर शिक्षकों को भी एलडीआर के माध्यम से शिक्षा विभाग में समायोजित करने की संभावनाएं तलाश की जाएं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने पूरे मामले का अध्ययन किया, लेकिन आउटसोर्स नीति के चलते प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
विभाग का मानना है कि यदि आउटसोर्स कर्मचारियों के एक वर्ग के लिए अलग नियमितीकरण नीति बनाई जाती है तो अन्य विभागों में आउटसोर्स पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए भी समान मांग उठ सकती है। इसी कानूनी और नीतिगत पहलू को देखते हुए फाइल विधि एवं कार्मिक विभाग को भेजी गई है, ताकि नियमितीकरण के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकें।प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्ष 1998 से कंप्यूटर शिक्षक डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं। शुरुआत में इन्हें सेल्फ फाइनेंस व्यवस्था के तहत नियुक्त किया गया था, लेकिन बाद में इन्हें आउटसोर्स श्रेणी में शामिल कर दिया गया। कंप्यूटर शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और कई स्कूलों में अकेले ही पूरी कंप्यूटर शिक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। ऐसे में उन्हें एसएमसी शिक्षकों की तर्ज पर नियमित करने की नीति बनाई जानी चाहिए।
उधर, प्रदेश हाई कोर्ट भी इस मामले में शिक्षा विभाग को तीन सप्ताह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दे चुका है। इससे पहले न्यायमूर्ति सत्येन वैद्य ने मनोज कुमार शर्मा व अन्य की याचिका स्वीकार करते हुए कंप्यूटर शिक्षकों के नियमितीकरण के पक्ष में आदेश जारी किए थे। इन्हीं आदेशों के अनुपालन को लेकर शिक्षा विभाग ने विधि विभाग से कानूनी राय मांगी है।अब सभी की निगाहें प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के अगले फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कंप्यूटर शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर क्या रास्ता निकलेगा।