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Padmini Ekadashi Vrat Paran / जानें 28 मई को किस समय करें पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 9 Hours Ago • 1 Min Read

Padmini Ekadashi Vrat Paran : पद्मिनी एकादशी व्रत को लेकर श्रद्धालुओं के बीच पारण की तिथि को लेकर असमंजस बना हुआ था, क्योंकि 27 मई सुबह 6:21 बजे से द्वादशी तिथि शुरू हो चुकी है। पंचांग और वैदिक नियमों के अनुसार एकादशी व्रत का पारण 28 मई को सूर्योदय के बाद किया जाएगा, जिसके लिए सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक का समय शुभ माना गया है।

द्वादशी तिथि शुरू होने के बाद पारण को लेकर बना असमंजस

ज्येष्ठ अधिकमास की शुक्ल पक्ष एकादशी यानी पद्मिनी एकादशी का व्रत बुधवार 27 मई को रखा गया। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 27 मई सुबह 6 बजकर 21 मिनट तक रही, जिसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ हो गई। इसी कारण कई श्रद्धालुओं के बीच यह प्रश्न बना रहा कि व्रत का पारण 27 मई को किया जाए या 28 मई को।धार्मिक मान्यताओं और वैदिक पंचांग के अनुसार एकादशी व्रत का पारण हमेशा द्वादशी तिथि में और सूर्योदय के बाद किया जाता है। इसी नियम के आधार पर इस वर्ष पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण 28 मई को किया जाएगा।

28 मई को रहेगा पारण का शुभ समय

पंचांग गणना के अनुसार गुरुवार 28 मई को सूर्योदय के बाद पारण का समय सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक रहेगा। इस अवधि में व्रत खोलना शास्त्र सम्मत माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि द्वादशी समाप्त होने से पहले विधिपूर्वक पारण करना चाहिए।ज्योतिषीय गणना के अनुसार यदि किसी स्थिति में द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाए तो हरिवासर समाप्ति के बाद भी पारण किया जा सकता है। हालांकि इस बार पारण का निर्धारित समय 28 मई सुबह उपलब्ध रहेगा।

तीन वर्ष में एक बार आती है पद्मिनी एकादशी

पद्मिनी एकादशी अधिकमास में आने वाली विशेष एकादशी मानी जाती है। इसे कमला एकादशी और पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी प्रत्येक वर्ष नहीं आती, बल्कि लगभग तीन वर्षों में एक बार अधिकमास के दौरान पड़ती है।पद्म पुराण में भी पद्मिनी एकादशी के महत्व का उल्लेख मिलता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और दान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

पारण से पहले करें पूजा और स्नान

धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत खोलने से पहले प्रातः स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी को जल अर्पित कर पारण की प्रक्रिया शुरू की जाती है। पारण में पहले जल, फल या तुलसी युक्त पानी ग्रहण करने की परंपरा मानी जाती है।मान्यता के अनुसार पारण के दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और लहसुन, प्याज तथा तामसिक भोजन से परहेज करना उचित माना जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा भी देते हैं।

पारण वाले दिन चावल सेवन की परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन चावल का सेवन नहीं किया जाता, लेकिन द्वादशी तिथि में पारण के समय भोजन में चावल शामिल करना शुभ माना जाता है। इसी कारण कई लोग पारण के दौरान सामान्य सात्विक भोजन के साथ चावल भी ग्रहण करते हैं।

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