पंचायती राज चुनाव: जिला परिषद उम्मीदवारों पर खर्च की सख्त सीमा, 1 लाख से ज्यादा खर्च नहीं
Himachalnow / शिमला
प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला परिषद उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की सीमा तय कर दी है। अब जिला परिषद प्रत्याशी अधिकतम 1 लाख रुपये ही चुनाव में खर्च कर सकेंगे। वहीं बीडीसी और पंचायत प्रधान पद के उम्मीदवारों पर किसी तरह की खर्च सीमा लागू नहीं होगी, लेकिन उन्हें पूरा हिसाब देना अनिवार्य होगा।
शिमला
प्रदेश में पंचायत चुनावों की सरगर्मियां तेज होते ही राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए जिला परिषद उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर सख्त लगाम लगा दी है। अब कोई भी जिला परिषद प्रत्याशी चुनाव में एक लाख रुपये से अधिक खर्च नहीं कर सकेगा।यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पंचायत चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिला परिषद स्तर के चुनावों में पारदर्शिता बनाए रखने और धनबल के प्रभाव को सीमित करने के लिए यह सीमा तय की गई है।
वहीं, पंचायत समिति (बीडीसी) सदस्य और पंचायत प्रधान पद के उम्मीदवारों के लिए किसी भी प्रकार की खर्च सीमा निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि, सरकार की ओर से पंचायत प्रधान के लिए भी खर्च सीमा तय करने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे आयोग ने फिलहाल अस्वीकार कर दिया है।
खर्च पर कड़ी निगरानी, हर पैसे का देना होगा हिसाब
निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि जिला परिषद उम्मीदवारों के खर्च पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए फ्लाइंग स्क्वाड गठित किए जाएंगे, जो चुनाव प्रचार, वाहनों के उपयोग, बैंक लेन-देन और अन्य खर्चों पर पैनी नजर रखेंगे।हर प्रत्याशी को अपने चुनावी खर्च का पूरा ब्योरा निर्धारित प्रारूप में एक महीने के भीतर जमा करवाना अनिवार्य होगा। इसमें प्रचार सामग्री, सभाएं, खान-पान और अन्य सभी खर्च शामिल होंगे।यदि कोई उम्मीदवार खर्च का ब्योरा प्रस्तुत नहीं करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
प्रचार में गंदगी फैलाने पर भी जुर्माना
आयोग ने प्रचार सामग्री को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी की है। यदि प्रत्याशी प्रचार के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाते पाए जाते हैं, तो उन पर 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।कुल मिलाकर, इस बार पंचायत चुनावों में जहां एक ओर जिला परिषद उम्मीदवारों पर सख्ती बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर बीडीसी और प्रधान पद के लिए खुली छूट ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है।