Pangi Apple / अब कुल्लू-किन्नौर के नाम से नहीं बिकेगा पांगी का सेब, मिला अपना ब्रांड; 50 फीसदी अनुदान पर मिलेंगे कार्टन
पांगी घाटी में प्राकृतिक खेती से तैयार होने वाले सेब को अब अपनी अलग पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित सेबों के लिए ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड लॉन्च किया है। इससे पहले घाटी में पैदा होने वाले सेब बाजार में ‘कुल्लू एप्पल’ या ‘किन्नौर एप्पल’ के नाम से बेचे जाते थे। अब बागवानों को 10 और 20 किलोग्राम क्षमता वाले ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड के कार्टन 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध करवाए जाएंगे।
चंबा/पांगी
पहली बार अपनी पहचान के साथ बाजार पहुंचेगा पांगी का सेब
पांगी घाटी में उत्पादित सेब को बाजार में अलग पहचान दिलाने की दिशा में ‘पांगी एप्पल’ ब्रांड की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस ब्रांड को लॉन्च करते हुए प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
अब तक पांगी घाटी के बागवानों द्वारा तैयार सेब अपनी अलग ब्रांड पहचान के बजाय कुल्लू या किन्नौर के सेब के नाम से बाजार में बेचा जाता था। नए ब्रांड के बाद पांगी में तैयार सेब को उसके उत्पादन क्षेत्र के नाम से बाजार में उतारने का रास्ता खुल गया है।
10 और 20 किलो के कार्टन पर 50 प्रतिशत अनुदान
‘पांगी एप्पल’ की अलग पहचान बनाने के लिए विशेष पैकेजिंग की व्यवस्था भी की गई है। बागवानों को 10 और 20 किलोग्राम क्षमता वाले ‘पांगी एप्पल’ कार्टन उपलब्ध करवाए जाएंगे।
इन कार्टनों पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इससे घाटी के बागवान अपने सेब को ‘पांगी एप्पल’ की पहचान के साथ बाजार तक पहुंचा सकेंगे।
370 हेक्टेयर में सेब के 1.04 लाख से अधिक पौधे
पांगी घाटी में सेब उत्पादन का दायरा भी बड़ा है। यहां करीब 370 हेक्टेयर भूमि पर सेब के 1,04,000 से अधिक पौधे मौजूद हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार पांगी प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल है।
प्राकृतिक खेती के माध्यम से तैयार होने वाली उपज को अलग ब्रांड पहचान देने के पीछे स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने और किसानों-बागवानों की आर्थिकी मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस सीजन में 35 हजार पेटी सेब उत्पादन की उम्मीद
पांगी घाटी में इस सीजन के दौरान करीब 550 मीट्रिक टन सेब उत्पादन होने की उम्मीद है। पेटियों के हिसाब से यह उत्पादन लगभग 35 हजार पेटी रहने का अनुमान है।
अब इसी उत्पादन को ‘पांगी एप्पल’ के नाम से बाजार में अलग पहचान देने की तैयारी है। ब्रांडिंग और विशेष कार्टन के माध्यम से पांगी में प्राकृतिक खेती से तैयार सेब को उसके मूल उत्पादन क्षेत्र से जोड़कर बाजार में पेश किया जाएगा।
6,300 कृषक परिवारों की आजीविका से जुड़ी पहल
इस पहल को पांगी घाटी के लगभग 6,300 कृषक परिवारों की आजीविका मजबूत करने से भी जोड़ा गया है। सरकार का लक्ष्य पांगी को रसायन-मुक्त उपमंडल बनाने के साथ प्राकृतिक खेती के जरिए स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर किसानों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘पांगी एप्पल’ के माध्यम से स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और दूरदराज जनजातीय क्षेत्र में नए आर्थिक अवसर पैदा करने का भी लक्ष्य रखा गया है।