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प्राची हत्याकांड: बेटे को उम्रकैद की सजा का था अंदेशा, पिता की हार्ट अटैक से मौत

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

प्राची हत्याकांड में दोषी करार दिए गए आसिफ मोहम्मद को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। आरोपी के पिता ताज मोहम्मद की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि 2022 में न्याय की मांग को लेकर हाईवे जाम करने वाले 13 लोगों ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग उठाई है। दोनों घटनाक्रम क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

उप मंडल अम्ब में प्राची हत्याकांड के दोषी करार दिए गए आसिफ मोहम्मद को जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद एक ओर जहां पीड़ित पक्ष ने फैसले का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर आरोपी के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अदालत के फैसले से पहले ही आरोपी आसिफ मोहम्मद के पिता ताज मोहम्मद की हार्ट अटैक से मौत हो गई। उधर, वर्ष 2022 में प्राची को न्याय दिलाने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-503 पर चक्का जाम करने वाले 13 लोगों ने अब प्रदेश सरकार से अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग उठाई है।


बेटे की सजा का अंदेशा, रास्ते में बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, ताज मोहम्मद पुत्र फैजल मोहम्मद पिछले चार वर्षों से अपने बेटे आसिफ मोहम्मद के कानूनी बचाव के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार उन्हें पहले से ही इस बात का अंदेशा था कि अदालत इस मामले में उनके बेटे को कड़ी सजा सुना सकती है।
बताया जा रहा है कि 2 जून,2026 को अदालत की कार्यवाही के बाद घर लौटते समय उनकी अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। परिजन उन्हें तुरंत सिविल अस्पताल अंब ले गए, जहां उपचार के दौरान रात करीब 10:20 बजे उनकी हृदय गति रुक गई। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटे को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने से पहले से लेकर अब तक पिता की मौत की खबर क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

2022 में न्याय की मांग को लेकर हुआ था हाईवे जाम
प्राची हत्याकांड के बाद अप्रैल 2022 में क्षेत्र में भारी जनाक्रोश देखने को मिला था। लोगों ने दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-503 पर धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ था।इस मामले में पुलिस थाना अंब में एफआईआर दर्ज़ की गई थी। पुलिस ने आईपीसी की धारा 341 और 143 के साथ नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8-बी के तहत 13 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इन लोगों पर दर्ज है मामला
मामले में अश्वनी कुमार धीमान, मनोज कुमार, संजीव चौहान, प्रिंस ठाकुर उर्फ चंद्रशेखर, संजीव शर्मा, तनुज, विशाल सिंह, अजय कुमार, राघव ठाकुर, विकास राणा, सुदर्शन सिंह, सुरेश चंद और सीमा पटियाल को नामजद किया गया था।

फैसले का स्वागत, एफआईआर रद्द करने की मांग
अदालत द्वारा मुख्य आरोपी आसिफ मोहम्मद को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद इन लोगों ने फैसले का स्वागत किया है। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी निजी स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि एक बेटी को न्याय दिलाने के लिए था।उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि चूंकि मामले में अदालत का फैसला आ चुका है और न्याय की मांग को लेकर किए गए आंदोलन का उद्देश्य पूरा हो गया है, इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए। उनका कहना है कि उन्होंने जनभावनाओं के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठाई थी और अब सरकार को उनके मामले में राहत प्रदान करनी चाहिए।

क्षेत्र में चर्चा का विषय बने दोनों घटनाक्रम
एक ओर अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार और लोगों ने न्याय मिलने पर संतोष व्यक्त किया है, वहीं दूसरी ओर आरोपी के पिता की मौत और हाईवे जाम मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। दोनों घटनाएं क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है