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Pradosh Vrat 2024: गुरुवार को रखा जाएगा प्रदोष व्रत, जानें किस मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा

हिमाचलनाउ डेस्क • 28 Nov 2024 • 1 Min Read

Himachalnow / नाहन

मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत 2024: महत्व और पूजा विधि
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है। जैसा कि एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं, वैसे ही प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता मिलती है। प्रदोष व्रत को महीने में दो बार रखा जाता है – एक शुक्ल पक्ष में और दूसरा कृष्ण पक्ष में।


मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत 2024: कब और क्यों है खास?

मार्गशीर्ष मास में कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो 2024 में 28 नवंबर को है। हालांकि, मार्गशीर्ष मास के प्रदोष व्रत के बारे में कुछ भ्रम था कि यह व्रत 28 नवंबर को होगा या 29 नवंबर को। अब यह स्पष्ट हो गया है कि इस साल मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत 28 नवंबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 नवंबर, दिन गुरुवार को सुबह 6:23 पर होगी. इस तिथि का समापन 29 नवंबर को सुबह 09:43 पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 28 नवंबर, गुरुवार को प्रदोष व्रत रखा जाएगा.

मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत की तिथि:

  • तिथि: 28 नवंबर 2024 (गुरुवार)
  • समय: त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 नवंबर को सुबह 6:23 बजे और समापन 29 नवंबर को सुबह 09:43 बजे होगा।
  • व्रत का दिन: 28 नवंबर, गुरुवार को रखा जाएगा, जिसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत का शुभ योग और महत्व

मार्गशीर्ष प्रदोष व्रत के दिन विशेष सौभाग्य योग बन रहा है, जो 28 नवंबर की शाम 4:01 बजे तक रहेगा। इस समय में चित्रा नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है। इस विशेष योग में भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है और समस्त दुख-दर्द दूर होते हैं।

शुभ मुहूर्त:
28 नवंबर को शाम 6:23 बजे से लेकर रात 8 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ है। इस समय में शिव पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।


गुरु प्रदोष व्रत का महत्व

गुरु प्रदोष व्रत को विशेष रूप से शुभ माना गया है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत सबसे प्रभावी उपाय है। इस दिन पूजा करने से व्यक्ति को न केवल कष्टों से मुक्ति मिलती है, बल्कि उसकी हर कार्य में विजय प्राप्त होती है। साथ ही, यह व्रत सुख, ऐश्वर्य, प्रतिष्ठा और धन में वृद्धि करता है। इस दिन भगवान शिव की प्रदोष काल में पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में हर प्रकार की बाधाओं से छुटकारा मिलता है।