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राजीव गांधी वन संवर्धन योजना से वन विस्तार और ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा, 2030 तक 30 प्रतिशत वन आवरण का लक्ष्य

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

हिमाचल प्रदेश सरकार की राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत जनभागीदारी आधारित पौधरोपण, वन संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को एकीकृत करते हुए वर्ष 2030 तक प्रदेश का वन आवरण 30 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों और अन्य सामुदायिक संगठनों को पौधरोपण, पौध संरक्षण और रखरखाव की जिम्मेदारी के साथ वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है।

शिमला

2030 तक वन आवरण बढ़ाने का लक्ष्य

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बदलते जलवायु परिदृश्य, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा हरित क्षेत्र के विस्तार को ध्यान में रखते हुए राजीव गांधी वन संवर्धन योजना लागू की है। योजना का उद्देश्य वर्ष 2030 तक प्रदेश के वन आवरण को लगभग 28 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस पहल के माध्यम से वन संरक्षण, कार्बन पृथक्करण, जल संरक्षण, मृदा संरक्षण तथा जैव विविधता को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।

जनभागीदारी आधारित कार्यप्रणाली पर विशेष जोर

योजना के तहत महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्वयं सहायता समूहों तथा अन्य पंजीकृत सामुदायिक संगठनों को खाली एवं बंजर वन भूमि पर पौधरोपण का दायित्व सौंपा जा रहा है। प्रत्येक पात्र संगठन को पारिस्थितिकीय आवश्यकता एवं भूमि उपलब्धता के अनुसार अधिकतम पांच हेक्टेयर तक वन भूमि आवंटित की जा सकती है। वन विभाग अपनी नर्सरियों से गुणवत्तायुक्त पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है तथा पौधरोपण के बाद नियमित निगरानी और मूल्यांकन भी किया जा रहा है, ताकि लगाए गए पौधों की जीवित रहने की दर बेहतर बनी रहे।

पौधरोपण और रखरखाव के लिए वित्तीय सहायता

योजना के अंतर्गत पौधरोपण एवं पौधों के रखरखाव के लिए 1.20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। यदि आवंटित क्षेत्र एक हेक्टेयर से कम है तो सहायता राशि आनुपातिक आधार पर दी जाती है। इसके अतिरिक्त, पौधों की सत्यापित जीवित प्रतिशतता के आधार पर 1.20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर तक अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी समर्थन

राजीव गांधी वन संवर्धन योजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है। योजना के माध्यम से स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण कर प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने, जल स्रोतों के संरक्षण, मृदा अपरदन को नियंत्रित करने तथा जैव विविधता को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। वन संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भागीदारी भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगी।

धर्मशाला क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह का अनुभव

धर्मशाला के समीप घुरकड़ी स्थित ओम नमो नारायण स्वयं सहायता समूह को वन विभाग ने योजना के अंतर्गत लगभग दो हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण की जिम्मेदारी सौंपी। समूह ने पहले लैंटाना की झाड़ियों को हटाकर भूमि तैयार की, इसके बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर 1,600 से अधिक स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए। समूह की सदस्यों ने नियमित सिंचाई, संरक्षण और जंगली जानवरों से बचाव के लिए स्थानीय उपाय अपनाए, जिसके परिणामस्वरूप अधिकांश पौधे सुरक्षित एवं स्वस्थ रूप से विकसित हो रहे हैं।

धर्मशाला वन मंडल में पिछले वर्ष लगाए गए 22 हजार पौधे

मंडलीय वन अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि पिछले वर्ष धर्मशाला वन मंडल के अंतर्गत लगभग 28 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 22,000 पौधों का रोपण किया गया था। यह कार्य महिला मंडलों, युवक मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से पूरा हुआ। उन्होंने बताया कि योजना के तहत पौधरोपण के बाद अगले वर्ष पौधों की जीवित रहने की प्रतिशतता का मूल्यांकन किया जाता है और निर्धारित मानकों के अनुरूप संरक्षण होने पर संबंधित संगठन को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का प्रावधान है।

इस वर्ष 28 सामुदायिक संगठन होंगे शामिल

अमित कुमार ने बताया कि वर्तमान वर्ष में धर्मशाला वन मंडल के अंतर्गत 17 महिला मंडल, 6 युवक मंडल तथा 5 स्वयं सहायता समूह योजना में भाग ले रहे हैं। यह अभियान धर्मशाला, शाहपुर, नगरोटा बगवां और कांगड़ा विधानसभा क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा। पौधरोपण के दौरान हरड़, बेहड़ा, आंवला सहित स्थानीय औषधीय एवं फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता दी जा रही है। विभाग को इस वर्ष भी लगभग 3,000 महिलाओं सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भागीदारी की उम्मीद है।

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