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राशन की बोरियों में वजन कमी की शिकायतों पर जांच, रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 13 Jun 2026 • 1 Min Read

प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से राशन की सीलबंद बोरियों में वजन कम होने की शिकायतों के बाद सिविल सप्लाई कारपोरेशन की टीम ने जांच की है। हमीरपुर में किए गए निरीक्षण के दौरान कुछ बोरियों में निर्धारित मात्रा से कम आटा पाया गया, जिसके संबंध में रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है।

हमीरपुर

राशन आपूर्ति को लेकर उठे सवालों के बीच हुई जांच

खाद्य एवं आपूर्ति निगम के गोदामों से प्रदेशभर के लगभग 5200 उचित मूल्य की दुकानों (डिपुओं) तक पहुंचने वाली राशन सामग्री की मात्रा को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच सिविल सप्लाई कारपोरेशन की टीम ने निरीक्षण किया। लंबे समय से डिपो संचालकों की ओर से यह मुद्दा उठाया जा रहा था कि आटा, चावल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की सीलबंद बोरियों में निर्धारित वजन से कमी पाई जा रही है। इसी क्रम में प्रदेश डिपो संचालक समिति के प्रदेशाध्यक्ष के डिपो में राशन सामग्री की जांच की गई।

जांच के दौरान सीलबंद बोरियों में मिली कमी

निरीक्षण के दौरान सीलबंद आटे की बोरियों का वजन किया गया। जांच में कुछ बोरियों में लगभग 300 ग्राम से अधिक आटा कम पाया गया। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध सामग्री का रिकॉर्ड तैयार किया और संबंधित रिपोर्ट उच्च स्तर पर भेजी। विभागीय स्तर पर अब रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

कई जिलों से सामने आई हैं शिकायतें

डिपो संचालकों के अनुसार कुल्लू जिले के निरमंड, कांगड़ा के सदर क्षेत्र, हमीरपुर, चंबा के भरमौर तथा सुंडला सहित विभिन्न क्षेत्रों से राशन सामग्री के वजन में अंतर की शिकायतें सामने आई हैं। डिपो संचालकों ने कुछ मामलों में सीलबंद बोरियों को इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीनों पर रखकर उनके वजन का रिकॉर्ड भी साझा किया है। शिकायतों के अनुसार कुछ बोरियों में तीन से सात किलोग्राम तक वजन कम होने के दावे किए गए हैं, जिनकी विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है।

आपूर्ति प्रणाली को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण

सिविल सप्लाई कारपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि राशन सामग्री की आपूर्ति विभिन्न स्रोतों से की जाती है। कुछ सामग्री भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों से प्राप्त होती है, जबकि कुछ आपूर्ति सीधे आटा मिलों से की जाती है। अधिकारियों के अनुसार परिवहन के दौरान ट्रकों का कुल वजन निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांचा जाता है। हालांकि प्राप्त शिकायतों के मद्देनजर मामले की समीक्षा जारी है।

खाद्य तेल की आपूर्ति को लेकर भी उठे प्रश्न

डिपो संचालकों की ओर से खाद्य तेल की आपूर्ति को लेकर भी शिकायतें दर्ज करवाई गई हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में 12 लीटर क्षमता वाली पेटियों में 11 लीटर तक ही खाद्य तेल पाया गया। इस संबंध में भी विभागीय अधिकारियों को जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस विषय पर पूर्व में भी ध्यान आकर्षित कराया गया था और अब मामले की दोबारा समीक्षा की आवश्यकता है।

डिपो संचालक समिति ने उठाई कार्रवाई की मांग

प्रदेश डिपो संचालक समिति के अध्यक्ष अशोक कवि ने कहा कि यदि किसी स्तर पर वजन संबंधी अनियमितता पाई जाती है तो उसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नियमों का पालन नहीं करने वाली संबंधित आटा मिलों या आपूर्ति एजेंसियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जाए। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।