रेणुका बांध परियोजना को लेकर विरोध पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की उठाई मांग
रेणुका बांध बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हो रहे विरोध पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाते हुए इसे विकास विरोधी बताया है। लोगों ने परियोजना के समर्थन में कड़ा रुख अपनाते हुए विरोध करने वालों पर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
नाहन/श्री रेणुका जी
राष्ट्रीय महत्व की रेणुका बांध बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर चल रहे विरोध पर अब स्थानीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वर्षों की लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद शुरू हुई इस परियोजना का विरोध विकास कार्यों को बाधित करने का प्रयास है।जानकारी के अनुसार रेणुका जी बांध विस्थापित संघर्ष समिति द्वारा वन विभाग को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्यों पर आपत्ति जताई गई है। वहीं परियोजना से जुड़े पक्ष का कहना है कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने तमाम तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करवाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परियोजना केवल सिरमौर ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास से जुड़ी हुई है। उनका मानना है कि बांध निर्माण से सड़क, बिजली, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।लोगों ने यह भी कहा कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ पहले ही दिए जा चुके हैं। ऐसे में अब परियोजना का विरोध करना विकास विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।
स्थानीय लोगों ने मांग उठाई है कि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न करने और भ्रामक माहौल बनाने वालों की जांच कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि क्षेत्र का बड़ा वर्ग रेणुका बांध परियोजना के समर्थन में है और चाहता है कि निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े।उल्लेखनीय है कि रेणुका बांध परियोजना को केंद्र और प्रदेश स्तर पर विभिन्न स्वीकृतियों के बाद मंजूरी मिली थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस परियोजना का वर्चुअल शिलान्यास किया था, जिससे इसकी राष्ट्रीय प्राथमिकता स्पष्ट होती है।

