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SFI ने PTA फंड उपयोग को लेकर अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को सौंपा ज्ञापन, स्पष्ट नियमों की मांग

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 17 Jun 2026 • 1 Min Read

शिमला में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के प्रतिनिधिमंडल ने शैक्षणिक संस्थानों में PTA फंड के उपयोग, उसकी निगरानी और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को लेकर अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने आरोप लगाया कि विभिन्न संस्थानों में PTA फंड के उपयोग को लेकर स्पष्ट नियमों का अभाव है, जिसके चलते इसकी समीक्षा आवश्यक है।

शिमला

अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को सौंपा ज्ञापन

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) शिमला जिला कमेटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपकर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों से ली जा रही PTA फीस और उससे संबंधित फंड के उपयोग को लेकर अपनी चिंताएं दर्ज करवाईं। संगठन ने कहा कि विभिन्न कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में PTA फंड के संग्रहण और व्यय की प्रक्रिया में एकरूपता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। ज्ञापन के माध्यम से विभाग का ध्यान इस विषय की ओर आकर्षित करते हुए फंड के उपयोग से संबंधित नियमों को सार्वजनिक और स्पष्ट बनाने की मांग की गई।

PTA फंड के उपयोग पर उठाए सवाल

ज्ञापन में SFI ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों से PTA फंड के नाम पर राशि एकत्रित की जाती है, जिसका उद्देश्य संस्थानों की आवश्यकताओं और शैक्षणिक गतिविधियों को अतिरिक्त सहयोग प्रदान करना होता है। संगठन ने कुछ कॉलेजों में PTA फंड के उपयोग से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में फंड के व्यय को लेकर प्रश्न उठे हैं। ज्ञापन के अनुसार, राजकीय उत्कृष्टता महाविद्यालय संजौली में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के दौरान PTA फंड के रूप में 19 लाख रुपये से अधिक राशि एकत्रित की गई थी, जबकि राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में शैक्षणिक सत्र 2021-22 के दौरान 21 लाख रुपये से अधिक राशि एकत्रित किए जाने का उल्लेख किया गया है। संगठन ने इन मामलों की समीक्षा कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

स्पष्ट नियम बनाने की मांग

SFI ने अपने ज्ञापन में कहा कि अनुदान सहायता टू पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन नियम, 2006 में PTA की पात्रता, अनुदान की मात्रा तथा शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है, लेकिन PTA निधि के अन्य उपयोगों को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं। संगठन का कहना है कि स्पष्ट नियमों और मानकों के अभाव में विभिन्न संस्थानों में अलग-अलग तरीके अपनाए जाते हैं, जिससे फंड के उपयोग को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए पूरे प्रदेश के लिए एक समान और स्पष्ट नीति लागू किए जाने की आवश्यकता है।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें

SFI ने अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक के समक्ष PTA फंड के उपयोग को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की। इसके अलावा संगठन ने फंड के उपयोग से जुड़े मामलों की जांच के लिए एक समिति गठित करने, प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में PTA फंड की न्यूनतम और अधिकतम सीमा निर्धारित करने तथा फंड किन मदों में खर्च किया जा सकता है, इसके लिए स्पष्ट नियम तय करने की मांग रखी। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि PTA फंड से संबंधित वर्ष 2025 के प्रावधानों को सभी संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किया जाए ताकि वित्तीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

आश्वासन मिलने का दावा

SFI शिमला जिला सचिव पवन कुमार ने बताया कि अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक ने ज्ञापन में उठाए गए विभिन्न बिंदुओं पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा प्रस्तुत मांगों और सुझावों पर विभागीय स्तर पर विचार किए जाने की बात कही गई है। SFI ने यह भी कहा कि वह इस विषय पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रखेगी और आवश्यकता पड़ने पर आगामी चरण की रणनीति तय करेगी।