HNN/ नाहन
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कल से मां के जयकारों के साथ गूंज उठेंगे। जी हां, कल से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है जिसके चलते हिमाचल प्रदेश के पांचों शक्तिपीठों मां चिंतपूर्णी, मां नैना देवी, मां ज्वालामुखी, मां चामुंडा और मां बज्रेश्वरी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। हालांकि, अन्य दिनों के दौरान भी भारी तादाद में श्रद्धालु शक्तिपीठों में दर्शन करने पहुंचते हैं, परंतु नवरात्रि के दौरान प्रदेश सहित बाहरी राज्य के श्रद्धालुओं का यहाँ सैलाब उमड़ता है।
बता दें, आज पितृ पक्ष का समापन हो गया है तथा कल नवरात्रि की शुरुआत होगी। 26 सितंबर, सोमवार से मां आदिशक्ति की उपासना का ये पावन पर्व आरंभ होगा और इसका समापन 05 अक्टूबर को होगा। नवरात्रि के नौ दिनों तक प्रदेश के पांचों शक्तिपीठों सहित अन्य मंदिरों में देवी शक्ति के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाएगी। इस दिन हर व्यक्ति माता को प्रसन्न करने के लिए पूरी श्रद्धा से पूजा करता है और अपने सभी दुखों को दूर करने की प्रार्थना करता है। नवरात्रि में भक्त उपवास रखकर मां जगदंबे की विधि-विधान से पूजा करेंगे।
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शारदीय नवरात्रि तिथि मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि आरंभ- 26 सितंबर 2022,सुबह 03 बजकर 23 मिनट पर
प्रतिपदा तिथि का समापन – 27 सितम्बर 2022, सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर
घटस्थापना सुबह का मुहूर्त – प्रातः 06.17 से प्रातः 07.55
घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त – प्रातः 11:54 से दोपहर 12:42
इन चीजों को खाने से करना चाहिए परहेज
अगर आप नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत कर रहे हैं तो बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए। खासतौर पर डिब्बा बंद फूड। वहीं प्याज, लहसुन, मांस तो बिल्कुल भी ना खाएं। साथ में दालें, सूजी, मैदा को भी भक्तों को खाने से परहेज करना चाहिए। इतना ही नहीं गेंहू और चावल जैसे दैनिक अनाज का सेवन पूरी तरह से वर्जित है। इन अनाज की बजाय सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा या राजगिरा का आटा खाया जाता है। वहीं साबुदाने को भी व्रत में खाने की इजाजत होती है।
कलश स्थापना पूजा विधि
शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाकर मुख्य द्वार पर आम और अशोक के पत्ते का तोरण लगाएं। इसके बाद एक चौकी बिछाकर वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत से टीके और फिर वहां माता की प्रतिमा स्थापित करें।
उसके बाद विधिविधान से माता की पूजा करें। उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण में कलश रखना चाहिए और माता की चौकी सजानी चाहिए। कलश पर नारियल रखते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुख नीचे की तरफ न हो। कलश के मुंह पर चारों तरफ अशोक के पत्ते लगाएं और फिर एक नारियल पर चुनरी लपेटकर कलावा से इसे बांध दें। अब अम्बे मां का आह्वान करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा करें।
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