हाईकोर्ट ने सड़कों के किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की डंपिंग पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सड़कों के किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को खड़ा किए जाने और इससे यातायात प्रभावित होने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाते हुए वैकल्पिक डंपिंग स्थल और सड़कों की स्थिति पर विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शिमला
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने लिया संज्ञान
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सड़कों के किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को डंप किए जाने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत के समक्ष बताया गया कि पुलिस विभाग राष्ट्रीय राजमार्ग से एयरपोर्ट की ओर जाने वाली सड़क के किनारे दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को खड़ा कर रहा है, जिससे सड़क का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
500 मीटर से अधिक क्षेत्र में खड़े हैं दुर्घटनाग्रस्त वाहन
सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि संबंधित सड़क पर लगभग 500 मीटर से अधिक दूरी तक दोनों ओर दुर्घटनाग्रस्त एवं कबाड़ वाहनों को खड़ा किया गया है। इसके अतिरिक्त एयरपोर्ट मार्ग की सड़क की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और उसकी मरम्मत की आवश्यकता बताई गई। अदालत के समक्ष यह भी जानकारी रखी गई कि शिमला के चक्कर स्थित जिला अदालत के समीप भी सड़क किनारे ऐसे वाहन लंबे समय से खड़े हैं, जिससे आम लोगों और न्यायालय आने वाले व्यक्तियों को असुविधा हो रही है।
वैकल्पिक डंपिंग स्थल तलाशने के निर्देश
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा सड़क के अधिकार क्षेत्र का उपयोग दुर्घटनाग्रस्त या कबाड़ वाहनों को स्थायी रूप से खड़ा करने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने पुलिस विभाग को ऐसे वाहनों के लिए सड़कों से अलग उपयुक्त एवं चिन्हित डंपिंग स्थल की व्यवस्था करने पर विचार करने के निर्देश दिए, ताकि यातायात और सार्वजनिक आवागमन प्रभावित न हो।
संबंधित अधिकारियों से मांगा गया हलफनामा
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सचिव (गृह), पुलिस अधीक्षक शिमला और अधीक्षण अभियंता, शिमला सर्कल को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।
