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शिमला मानव भारती फर्जी डिग्री घोटाले में आरोपी मनदीप राणा की संपत्ति जब्त करने के आदेश जारी

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन2 • 29 Apr 2026 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित मानव भारती फर्जी डिग्री घोटाले में आरोपी मनदीप राणा की दो संपत्तियों को जब्त करने के आदेश विशेष न्यायालय (पीएमएलए), शिमला द्वारा जारी किए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के शिमला उप-आंचलिक कार्यालय को यह कार्रवाई करने की अनुमति मिली है। इससे पहले 3 जनवरी 2026 को अदालत ने मनदीप राणा को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।

शिमला

ईडी जांच और मामले की शुरुआत
ईडी की जांच सोलन जिले के धर्मपुर थाना क्षेत्र में दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला मानव भारती विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी संस्थाओं में कथित रूप से फर्जी डिग्रियों की बिक्री से संबंधित है। जांच में सामने आया है कि एक संगठित नेटवर्क के माध्यम से एजेंटों और बिचौलियों की मदद से छात्रों से पैसे लेकर डिग्रियां जारी की जाती थीं। इस पूरे प्रकरण को लेकर कई स्तरों पर आर्थिक लेन-देन की जांच की जा रही है।

नेटवर्क और आरोपों का विस्तृत विवरण
जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे रैकेट का संचालन राज कुमार राणा द्वारा अपने परिवार और सहयोगियों के साथ मिलकर किया जा रहा था। इसमें उसकी पत्नी आशोनी कंवर और बेटा मनदीप राणा भी शामिल बताए गए हैं। आरोप है कि यह नेटवर्क छात्रों से पैसे लेकर मानव भारती विश्वविद्यालय के नाम पर फर्जी डिग्रियां उपलब्ध कराता था और इसके लिए एजेंटों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस प्रक्रिया में विभिन्न माध्यमों से धन का लेन-देन किया जाता था।

387 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला
ईडी के अनुसार इस पूरे घोटाले में लगभग 387 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है। जांच में यह भी पाया गया है कि अवैध रूप से अर्जित धन को अलग-अलग वित्तीय लेन-देन के माध्यम से छुपाया गया और बाद में इसका उपयोग कई राज्यों में चल और अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। अब तक जांच एजेंसी लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क कर चुकी है और आगे भी संपत्तियों की पहचान की जा रही है।

भगोड़ा घोषित होने के बाद कार्रवाई तेज
जांच के दौरान मनदीप राणा को कई बार समन जारी किए गए, लेकिन वह जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ और लगातार अनुपस्थित रहा। एजेंसी के अनुसार उसने अदालत की प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिसके चलते उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 के तहत भगोड़ा घोषित किया गया। इसके बाद अब अदालत के ताजा आदेशों के अनुसार उसकी संपत्तियों की जब्ती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है और मामले में कानूनी कार्रवाई जारी है।