Himachalnow / शिमला
शिमला: राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) घंडल से 43 कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ शुक्रवार को कर्मचारियों ने सीटू के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बिना किसी पूर्व नोटिस के पक्षपातपूर्ण तरीके से उन्हें नौकरी से बाहर कर दिया।
सीटू का विरोध: ‘हायर एंड फायर नीति मंजूर नहीं’
धरने को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा,
“यह शर्मनाक है कि जो कर्मचारी पिछले पांच से छह सालों से ईमानदारी और निष्ठा से अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें बिना किसी ठोस कारण के अचानक नौकरी से हटा दिया गया। हायर एंड फायर की नीति हमारे देश में मान्य नहीं है।”
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विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी प्रभावित
निकाले गए कर्मचारियों में विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं, जिनमें स्पाई (सफाई कर्मचारी), सुरक्षा कर्मी, हॉस्टल अटेंडेंट, कारपेंटर, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर, और अन्य तकनीकी स्टाफ शामिल हैं। इन सभी ने प्रशासन के इस कदम को गरीब विरोधी बताते हुए कड़ा विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों की मांग
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को नौकरी पर बहाल किया जाए और भविष्य में ऐसे अन्यायपूर्ण फैसलों को रोकने के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं।
सीटू की चेतावनी
विजेंद्र मेहरा ने कहा कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द कदम नहीं उठाया तो आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा,
“देश का कानून रातोंरात नौकरी से हटाने की इजाजत नहीं देता। हम हायर एंड फायर की नीति को पूरी तरह खारिज करते हैं और इसे मजदूर विरोधी करार देते हैं।”
अगले कदम पर नजर
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखेंगे। अब सबकी नजरें सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन पर हैं कि वे इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं।
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