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जिला परिषद में पांचवीं बार श्रीरेणुकाजी का परचम, विधानसभा का किला अब भी भाजपा के लिए अभेद्य

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 1 Hour Ago • 1 Min Read

श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र ने पांचवीं बार जिला परिषद अध्यक्ष पद हासिल कर स्थानीय राजनीति में अपना प्रभाव साबित किया है। पंचायत और लोकसभा चुनावों में भाजपा को लगातार समर्थन मिलता रहा है, लेकिन विधानसभा चुनावों में पार्टी अब तक स्थायी सफलता नहीं हासिल कर सकी। शिवानी के अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा की स्थानीय बढ़त को विधानसभा जीत में बदलने की संभावनाओं पर फिर बहस तेज हो गई है।

नाहन

ददाहु वार्ड की शिवानी के सिरमौर जिला परिषद अध्यक्ष चुने जाने के साथ ही श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र ने एक बार फिर जिला परिषद की राजनीति में अपना दबदबा साबित कर दिया है। यह पांचवां मौका है जब जिला परिषद अध्यक्ष पद इस विधानसभा क्षेत्र की झोली में गया है। लेकिन इस राजनीतिक सफलता के साथ एक ऐसा सवाल भी फिर चर्चा में आ गया है, जिसका जवाब भाजपा पिछले कई दशकों से तलाश रही है—आखिर पंचायत और संसदीय चुनावों में मजबूत दिखाई देने वाली पार्टी विधानसभा चुनाव में श्रीरेणुकाजी का किला क्यों नहीं जीत पाती?राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो जिला परिषद और पंचायती राज संस्थाओं में श्रीरेणुकाजी क्षेत्र का प्रभाव लगातार बढ़ता रहा है। भाजपा समर्थित उम्मीदवार यहां पंचायत, जिला परिषद और लोकसभा चुनावों में अक्सर बढ़त हासिल करते रहे हैं। हालिया जिला परिषद चुनाव में भी भाजपा ने जिले में स्पष्ट बहुमत हासिल कर इस धारणा को और मजबूत किया है।

इसके बावजूद विधानसभा चुनावों का गणित हर बार अलग तस्वीर पेश करता है। नियमित विधानसभा चुनावों में भाजपा को आज तक इस सीट पर सफलता नहीं मिली। वर्ष 1998 में हृदय राम उपचुनाव के जरिए भाजपा विधायक बने थे, जबकि उससे पहले रूप सिंह जनता दल के टिकट पर विधानसभा पहुंचे थे। इसके अलावा विधानसभा सीट भाजपा के लिए हमेशा चुनौती बनी रही।राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसका सबसे बड़ा कारण संगठन की रणनीतिक चूक और प्रत्याशी चयन रहा है। कई बार ऐसा हुआ जब पार्टी के पक्ष में माहौल दिखाई दिया, लेकिन उम्मीदवार चयन अंतिम समय में भाजपा की चुनावी गणित पर भारी पड़ गया। क्षेत्रीय संतुलन और स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी को भी पार्टी की कमजोरी माना जाता रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र में हरिपुरधार और नौहराधार बेल्ट चुनावी दृष्टि से बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। यदि भाजपा भविष्य में इस भू-भाग से किसी मजबूत, स्वीकार्य और जमीनी नेता को सामने लाती है तो मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है। यही वह राजनीतिक धुरी मानी जाती है जो चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार करते हैं। ऐसे में जिला परिषद और पंचायत चुनावों में भाजपा की लगातार बढ़त को कांग्रेस के लिए भी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि यह भी उतना ही बड़ा सच है कि विनय कुमार अब तक स्थानीय चुनावी समीकरणों को अपने पक्ष में साधने में सफल रहे हैं।

दिलचस्प यह है कि श्रीरेणुकाजी की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस की ताकत अलग-अलग चुनावों में अलग रूप में दिखाई देती है। लोकसभा चुनाव हो, पंचायत चुनाव हों या जिला परिषद के चुनाव—भाजपा मजबूत नजर आती है। लेकिन जैसे ही लड़ाई विधानसभा की होती है, तस्वीर बदल जाती है और कांग्रेस बढ़त बना लेती है।शिवानी के जिला परिषद अध्यक्ष बनने के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भाजपा इस बार स्थानीय निकायों में मिली राजनीतिक बढ़त को विधानसभा की जीत में बदल पाएगी, या फिर श्रीरेणुकाजी का विधानसभा इतिहास एक बार फिर जिला परिषद और विधानसभा के बीच का यह राजनीतिक विरोधाभास कायम रखेगा।सियासी गलियारों में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या भाजपा को आखिरकार श्रीरेणुकाजी का फॉर्मूला मिल गया है, या विधानसभा चुनाव आते-आते फिर बदल जाएंगे समीकरण?