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सिरमौर में नदियों के तटीय क्षेत्र को सुरक्षित बनाने की योजना, 3 नदियों के तटीकरण पर खर्च होंगे 376 करोड़

हिमाचलनाउ डेस्क • 22 Jan 2025 • 1 Min Read

जलशक्ति विभाग ने सिरमौर जिले में बरसात के दौरान कहर बरपाने वाली तीन प्रमुख नदियों – यमुना, गिरि, और मरकंड – के तटीय क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने की योजना तैयार की है। इस योजना पर लगभग 366 करोड़ रुपये की लागत आएगी।


योजना को मिली हरी झंडी

जलशक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता राजीव कुमार महाजन ने बताया कि यह महत्वाकांक्षी योजना अब फंडिंग एजेंसी की मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही है। योजना के तहत, संभावित खतरे वाले क्षेत्रों की निशानदेही की जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भवन निर्माण नदी से सुरक्षित दूरी पर हो।


आधुनिकीकरण से खर्च में कटौती

राजीव महाजन ने विभाग की योजनाओं को ऑटोमाइज करने की बात कही, जिससे खर्च में कमी लाई जाएगी।

  • ऑटोमाइजेशन के लाभ:
    • बिजली खर्च में कमी: वोल्टेज फ्लक्चुएशन और अन्य कारणों से होने वाली ऊर्जा हानि को रोका जाएगा।
    • रिपेयर कॉस्ट शून्य के करीब: उपकरणों की क्षति, जैसे पंप और मोटर के डैमेज, को न्यूनतम किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस ऑटोमाइजेशन के माध्यम से बचत की गई धनराशि का उपयोग नई योजनाओं को ऑटोमाइज करने में किया जाएगा।


दुर्गम इलाकों में आधुनिक तकनीक का उपयोग

महाजन ने बताया कि विभाग दुर्गम क्षेत्रों में भी आधुनिक तकनीकों के साथ काम कर रहा है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि न केवल मौजूदा योजनाओं की गुणवत्ता बेहतर हो, बल्कि नई योजनाएं भी समय पर और कुशलता से पूरी की जा सकें।


एक साल में लक्ष्य पूरा करने का प्रयास

ऑटोमाइजेशन से होने वाली बचत के माध्यम से विभाग का लक्ष्य है कि एक साल में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाए। इसके बाद, सरकार से फंडिंग के माध्यम से नई योजनाओं को भी इसी दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।


यह परियोजना न केवल सिरमौर जिले को बाढ़ और नदी तटीय क्षति से बचाने में सहायक होगी, बल्कि ऊर्जा और मरम्मत के खर्च को भी कम करके स्थायी विकास को बढ़ावा देगी। जलशक्ति विभाग का यह कदम सिरमौर जिले के बुनियादी ढांचे और पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।