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Special Parliament Session / महिला आरक्षण पर वोटिंग से पहले पीएम मोदी की अपील, लोकसभा में चर्चा तेज

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 14 Hours Ago • 1 Min Read

Special Parliament Session : संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन पर चर्चा के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में वोटिंग से पहले सभी दलों से इसके पक्ष में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने इसे देश की नारीशक्ति को उनका अधिकार देने का अवसर बताया। आधिकारिक और सार्वजनिक स्रोतों के अनुसार, 17 अप्रैल को इस मुद्दे पर चर्चा जारी रही और मतदान शाम चार बजे प्रस्तावित बताया गया।

नई दिल्ली

वोटिंग से पहले पीएम मोदी की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटिंग से पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि संसद में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन पर चर्चा चल रही है और अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसका अधिकार मिले। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से सोच-समझकर और पूरी संवेदनशीलता के साथ महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उनके सार्वजनिक संदेश में यह भी कहा गया कि इतने दशकों बाद भी महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में कम प्रतिनिधित्व ठीक नहीं है।

‘अपनी अंतरात्मा को सुनिए’ वाला संदेश

प्रधानमंत्री के एक अन्य सार्वजनिक संदेश में सांसदों से कहा गया कि वे मां, बहन, बेटी और पत्नी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें। उन्होंने इसे नारीशक्ति की सेवा और सम्मान का बड़ा अवसर बताते हुए कहा कि यदि यह संशोधन सर्वसम्मति से पारित होता है तो देश की महिलाएं और लोकतंत्र दोनों मजबूत होंगे। यह संदेश महिला आरक्षण पर सरकार के राजनीतिक और भावनात्मक आग्रह को भी सामने लाता है।

सत्र में चर्चा और विधेयकों की पृष्ठभूमि

सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, विशेष संसद सत्र के पहले दिन संबंधित विधेयक पेश किए गए थे और 17 अप्रैल को भी उन पर चर्चा जारी रही। उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण को 2029 तक लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़े विधायी प्रस्तावों पर आगे बढ़ रही है। हालांकि, इन प्रस्तावों को लेकर परिसीमन और जनगणना जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस भी तेज बनी हुई है।

महिला प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर पुराना संदर्भ

महिला आरक्षण का प्रश्न लंबे समय से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। संसद के आधिकारिक अभिलेखों और सरकारी सारांशों के अनुसार, 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए पारित किया गया था। मौजूदा बहस इसी व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक संदर्भ में देखी जा रही है।