सुख-आश्रय योजना से अभिषेक ने बनाया पक्का घर, तीन लाख रुपये की सहायता बनी सहारा
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत मिली तीन लाख रुपये की सहायता से ऊना जिले के बहडाला निवासी 24 वर्षीय अभिषेक कुमार ने अपनी जमा पूंजी जोड़कर पक्का घर बनाया है। माता-पिता का संरक्षण खो चुके अभिषेक को योजना के अंतर्गत जीवन-यापन के लिए हर माह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी मिल रही है। पक्का मकान बनने से कच्चे घर में बरसात के दौरान होने वाली परेशानी और असुरक्षा से उन्हें राहत मिली है।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल
अभिषेक के पिता का वर्ष 2006 में निधन हो गया था। उनके पिता दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। वर्ष 2016 में मां के निधन के बाद अभिषेक को कम उम्र में ही अपनी जिंदगी संभालने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। उन्होंने मजदूरी करने के साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी की। सीमित आमदनी और रोजमर्रा के खर्चों के कारण उनके लिए नया पक्का मकान बनाने के लिए पर्याप्त राशि जुटाना संभव नहीं हो पा रहा था।
कच्चे मकान में रहते हुए अभिषेक को बरसात के दिनों में छत और दीवारों को लेकर चिंता बनी रहती थी। इसी बीच उन्हें मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी मिली। उन्होंने स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय, ऊना से जोड़ा गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर आवास निर्माण के लिए तीन लाख रुपये की सहायता चार किस्तों में प्रदान की गई।
अपनी जमा पूंजी के साथ तैयार किया नया मकान
अभिषेक ने योजना से मिली सहायता और अपनी जमा पूंजी का उपयोग कर उसी भूमि पर नया पक्का मकान तैयार किया है। उनका कहना है कि माता-पिता के निधन के बाद जीवन संभालना कठिन था, लेकिन सरकारी सहायता से घर बनाने में मदद मिली। योजना के तहत हर माह मिलने वाले चार हजार रुपये से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी सहारा मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना 28 फरवरी 2023 को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई थी। इसके तहत माता-पिता का संरक्षण खो चुके बच्चों और युवाओं की शिक्षा, देखभाल, आवास और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए सहायता का प्रावधान है। हिमाचल प्रदेश में अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा दिया गया है और पात्र बच्चों तथा युवाओं को 27 वर्ष की आयु तक सहायता प्रदान की जा रही है।
शिक्षा से स्वरोजगार तक सहायता का प्रावधान
योजना में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, विवाह सहायता और आवास के साथ पात्र युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये तक की सहायता का भी प्रावधान है। जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस ऊना हरीश मिश्रा ने बताया कि पात्र बच्चों और युवाओं को विभिन्न जरूरतों के लिए सहायता दी जा रही है। उपायुक्त ऊना जतिन लाल के अनुसार जिला प्रशासन पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है।