सुंदरनगर में स्मार्ट मीटरिंग परियोजना स्थगित करने की मांग, किसान सभा ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
हिमाचल किसान सभा की सुंदरनगर इकाई ने उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रस्तावित स्मार्ट मीटरिंग परियोजना लागू करने का विरोध किया है। सभा ने 17 अगस्त 2026 को विद्युत मंडल सुंदरनगर के वरिष्ठ अधिशासी अभियंता के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर परियोजना तत्काल स्थगित करने, इसकी लागत और निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने तथा उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ नहीं डालने की मांग की।
सुंदरनगर
सभा के सचिव रामजी दास की अध्यक्षता में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि मौजूदा डिजिटल बिजली मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने से पहले उपभोक्ताओं की सहमति ली जानी चाहिए। किसान सभा ने स्मार्ट मीटरों की लागत बिजली टैरिफ के माध्यम से उपभोक्ताओं से वसूलने की प्रस्तावित व्यवस्था पर चिंता जताई। साथ ही परियोजना के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने तथा किसी भी निर्णय से पहले उपभोक्ता संगठनों की भागीदारी और आवश्यक नियामकीय समीक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।

किसान सभा के सदस्य सुरेंद्र सेन ने सुंदरनगर सहित पूरे प्रदेश में परियोजना स्थगित करने की मांग की। उन्होंने परियोजना की अनुमानित और वास्तविक लागत, निविदा प्रक्रिया तथा करीब 2,500 करोड़ रुपये के वित्तीय औचित्य की स्वतंत्र जांच कराने की बात कही। सभा का कहना है कि स्मार्ट मीटरों की लागत का बोझ उपभोक्ताओं, विशेष रूप से गरीबों, किसानों और सब्सिडी प्राप्त परिवारों पर नहीं डाला जाना चाहिए।
रोजगार और उपभोक्ता डेटा की सुरक्षा का मुद्दा उठाया
जिला सदस्य जगमेल ठाकुर ने मीटर रीडिंग और बिलिंग से जुड़े कर्मचारियों के रोजगार की सुरक्षा की मांग उठाई। उन्होंने उपभोक्ताओं के बिजली खपत संबंधी डेटा की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। किसान सभा ने प्रीपेड बिजली, सब्सिडी में बदलाव अथवा प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण जैसी संभावित व्यवस्थाओं पर सार्वजनिक परामर्श कराने की मांग की है, ताकि उपभोक्ताओं से जुड़े किसी भी बदलाव से पहले सभी पक्षों की राय ली जा सके।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में रामजी दास, जगमेल ठाकुर, जोगिंदर वालिया, श्याम लाल, योगेश कुमार, कश्मीर सिंह, जय सिंह, राजेश शर्मा, हेम राज, रमजान, गुलाम रसूल, कपूर सिंह, दूनी चंद शर्मा, लाल सिंह और सुरेंद्र सेन सहित अन्य किसान प्रतिनिधि शामिल रहे। किसान सभा ने कहा कि यदि 10 दिनों के भीतर सरकार और एचपीएसईबीएल ने मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो वह लोकतांत्रिक एवं संघर्षात्मक कदम उठाएगी।
