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  • सिरमौर में 11 लाख पर्यटक: पहाड़, परंपरा और स्वाद ने बनाया नया टूरिज्म मॉडल

    सिरमौर में 11 लाख पर्यटक: पहाड़, परंपरा और स्वाद ने बनाया नया टूरिज्म मॉडल

    11 लाख सैलानी, 160 होमस्टे और सिरमौर का क्यूज़ीन: पर्यटन की उभरी नई पहचान 

    हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

    जिला सिरमौर में पर्यटन अब केवल पहाड़ और मंदिरों तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2025 के अंत तक जिले में करीब 11 लाख पर्यटकों की आमद दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि सिरमौर अब प्रदेश के उभरते पर्यटन जिलों में मजबूती से अपनी जगह बना रहा है।

    मौसम में आए बदलाव, डिजिटल मीडिया पर सिरमौर के पारंपरिक हिमाचली व्यंजनों की बढ़ती मौजूदगी और प्राकृतिक वातावरण में ठहरने की चाह ने यहां के होमस्टे टूरिज्म को नई उड़ान दी है।

    वर्तमान में जिला सिरमौर में लगभग 160 होमस्टे पंजीकृत हैं, जिनमें 150 पुराने और 10 नए पंजीकरण शामिल हैं।

    राज्य सरकार और पर्यटन विभाग की ओर से भी होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा भी होमस्टे के ऑनलाइन पंजीकरण पर विशेष जोर दिया गया है।

    हिमाचल प्रदेश होमस्टे नियम–2025 के तहत जिले की सभी होमस्टे इकाइयों को अधिसूचना जारी होने के तीन माह के भीतर जिला पर्यटन विकास अधिकारी के पास पंजीकरण करवाना अनिवार्य किया गया है। उल्लेखनीय यह है कि यह पंजीकरण पूरी तरह निशुल्क रखा गया है।

    सिरमौर की खास पहचान अब उसके क्यूज़ीन टूरिज्म से भी बन रही है। हरिपुरधार स्थित मानव हिल रिजॉर्ट, बढ़ियालटा इसका बड़ा उदाहरण है, जहां प्राकृतिक वातावरण के बीच पारंपरिक होमस्टे व्यवस्था, स्थानीय उत्पादों से बना ट्रेडिशनल फूड और महिलाओं के समूहों द्वारा तैयार किया गया ‘शी-हाट’ स्वाद पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहा है।

    जिले के प्रमुख होटल और रिसॉर्ट्स भी पर्यटन को मजबूत आधार दे रहे हैं। ग्रैंड व्यू रिजॉर्ट, जमटा, सलानी रिसोर्ट सेन वाला नहान होटल जय क्लार्क, होटल ब्लैक मैंगो, काला अंब और सरांहा स्थित होटल यूनिवर्स बेहतर सेवाओं, सुविधाजनक लोकेशन और आरामदायक ठहराव के चलते पर्यटकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं।

    धार्मिक पर्यटन सिरमौर की रीढ़ बना हुआ है। श्री रेणुका जी, बाला सुंदरी मंदिर त्रिलोकपुर, भुर्शिंग महादेव पच्छाद, शृंग ऋषि की गुफाएं बागथन,

    चूड़धार स्थित चूड़ेश्वर महादेव, हरिपुरधार मां भगांइनी मंदिर, नाहन की मां काली मंदिर, पांवटा साहिब का ऐतिहासिक गुरुद्वारा, पातालेश्वर महादेव, पौड़ी वाला शिव मंदिर और आदि बद्री स्थित मां सरस्वती का उद्गम स्थल जिले को धार्मिक नक्शे पर विशेष पहचान दिलाते हैं।

    पर्यटन विभाग अब भविष्य की दिशा भी तय कर रहा है। एडवेंचर टूरिज्म के साथ-साथ ट्रैकिंग, नेचर वॉक, फॉरेस्ट स्टे और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं पर भी मंथन किया जा रहा है।

    इसके अलावा केंद्र सरकार के हालिया बजट में सामने आए हेल्थ टूरिज्म के विज़न को सिरमौर में लागू करने की संभावना भी तलाशी जा रही है।

    प्राकृतिक वातावरण में नेचर ट्रीटमेंट और वेलनेस यूनिट स्थापित कर न केवल पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

    जिला पर्यटन विकास अधिकारी पदमा नेगी ने बताया कि आने वाले समय में होमस्टे और होटल संचालकों के सहयोग से फूड फेस्टिवल आयोजित किए जाएंगे, जिसमें प्राकृतिक खेती से उत्पादित सब्जियां, फल और पारंपरिक व्यंजनों के जरिए सिरमौर की फूड कल्चर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

    कुल मिलाकर, 11 लाख पर्यटकों की आमद यह साफ संकेत है कि सिरमौर अब केवल एक शांत पहाड़ी जिला नहीं, बल्कि परंपरा, प्रकृति, स्वाद और संभावनाओं का समृद्ध पर्यटन केंद्र बनकर उभर रहा है।

  • लोकआस्था और सामाजिक संतुलन का केंद्र: मैड़ी का डेरा बाबा बडभाग सिंह जी

    लोकआस्था और सामाजिक संतुलन का केंद्र: मैड़ी का डेरा बाबा बडभाग सिंह जी

    ऊना / राजन शर्मा

    हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में, ऊना नगर से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित मैड़ी गांव की देवदारों से घिरी पहाड़ियों के बीच डेरा बाबा बडभाग सिंह जी उत्तर भारत का एक प्रमुख लोक-आस्था केंद्र है।

    यह स्थल केवल धार्मिक विश्वास तक सीमित नहीं, बल्कि सदियों से सामाजिक संतुलन, मानसिक शांति और सामूहिक चेतना का प्रतीक रहा है।हर वर्ष पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मैड़ी का डेरा आस्था, साधना और आध्यात्मिक उपचार की उस परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जो लोकजीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।इतिहास के अनुसार बाबा बडभाग सिंह जी का जन्म वर्ष 1715 में पंजाब के करतारपुर में सोढ़ी वंश में हुआ माना जाता है।

    वे धीर मल के वंशज तथा गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार से संबंधित बताए जाते हैं। यह वह दौर था जब अहमद शाह अब्दाली के आक्रमणों से उत्तर भारत राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता से गुजर रहा था।

    इन परिस्थितियों में बाबा बडभाग सिंह जी हिमाचल की ओर आए और धारशणी खड्ड के समीप वनों में साधना करते हुए मैड़ी को अपनी तपोभूमि बनाया। उनका यहां स्थायी निवास सीमांत क्षेत्रों में संत परंपरा की उस भूमिका को दर्शाता है, जिसने अशांत समय में समाज को मानसिक और नैतिक संबल दिया।

    लोकमान्यताओं के अनुसार बाबा बडभाग सिंह जी ने एक बेर के वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या कर सिद्धियां प्राप्त कीं। कहा जाता है कि उन्होंने नरसिंह नामक उग्र आत्मा को वश में कर मानव सेवा के लिए बाध्य किया। इस लोककथा को अंधविश्वास के बजाय सामाजिक मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि ऐसे लोक-तीर्थ पारंपरिक समाजों में भय, तनाव और मानसिक असुरक्षा से निपटने के सांस्कृतिक माध्यम रहे हैं।

    डेरा परिसर में स्थित गुरुद्वारा और बाबा जी की समाधि श्रद्धा का मुख्य केंद्र हैं। तपस्थली का वही बेर वृक्ष और चरण गंगा जलप्रपात श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। चरण गंगा के जल को पवित्र और रोगनाशक माना जाता है, जहां श्रद्धालु स्नान कर शारीरिक और आत्मिक शांति की कामना करते हैं।

    हर वर्ष फरवरी–मार्च माह में आयोजित होने वाला दस दिवसीय होली अथवा होला मोहल्ला मेला मैड़ी को भक्ति और उत्सव का विराट केंद्र बना देता है। इस दौरान अरदास, पवित्र स्नान और निशान साहिब का आरोहण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।

    भारत की धार्मिक परंपरा केवल ग्रंथों और संस्थानों तक सीमित नहीं रही है। देश की जीवंत संस्कृति ऐसे लोक-आधारित तीर्थों से भी निर्मित हुई है, जिन्होंने पीढ़ियों तक समाज को नैतिक दिशा और सामूहिक पहचान प्रदान की। मैड़ी का डेरा बाबा बडभाग सिंह जी इसी परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    आज यह स्थल केवल एक धार्मिक केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संवाद और सामाजिक समरसता का मंच बन चुका है। विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालु इस बात का प्रमाण हैं कि आस्था किस प्रकार क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर राष्ट्रीय चेतना से जुड़ती है।

    मैड़ी का डेरा बाबा बडभाग सिंह जी हमें यह समझने का अवसर देता है कि भारत की जीवंत संस्कृति किस प्रकार स्थानीय आस्थाओं के माध्यम से आकार लेती है। यह परंपरा आज भी विश्वास, आशा और उपचार के रूप में हिमालय की गोद में निरंतर प्रवाहित हो रही है।

  • दाड़ी फीडर में 9 फरवरी को बिजली रहेगी बंद.. और यहां नहीं रहेगी लाइट

    दाड़ी फीडर में 9 फरवरी को बिजली रहेगी बंद.. और यहां नहीं रहेगी लाइट

    हिमाचल नाऊ न्यूज धर्मशाला

    धर्मशालाविद्युत लाईनों के सामान्य रखरखाव के चलते 11 केवी दाड़ी फीडर से जुड़े क्षेत्रों में 9 फरवरी को बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

    सहायक अभियन्ता विद्युत उपमंडल नम्बर-2 धर्मशाला रमेश चंद ने बताया कि दाड़ी फीडर के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र पासू, भटेड़, पंतेहड़, मनेड़ तथा साथ लगते क्षेत्रों में प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक या कार्य पूर्ण होने तक विद्युत आपूर्ति बंद रहेगी।

    उन्होंने बताया कि रखरखाव कार्य निर्धारित समय में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। खराब मौसम या अन्य तकनीकी कारणों की स्थिति में यह कार्य अगले दिन किया जा सकता है।

    विद्युत विभाग ने संबंधित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं से अपील की है कि निर्धारित शटडाउन अवधि को ध्यान में रखते हुए अपने आवश्यक कार्य समय रहते निपटा लें।

    विभाग ने कहा कि यह शटडाउन उपभोक्ताओं को बेहतर और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिसके लिए विभाग उपभोक्ताओं के सहयोग की अपेक्षा करता है।

  • बिलासपुर में प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम की समीक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए नए एक्शन प्लान पर जोर

    बिलासपुर में प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम की समीक्षा, वरिष्ठ नागरिकों के लिए नए एक्शन प्लान पर जोर

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ बिलासपुर

    जिला बिलासपुर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त बिलासपुर ओम कांत ठाकुर ने की।

    बैठक में नेशनल और स्टेट एक्शन प्लान फॉर सीनियर सिटिज़न्स के तहत चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए इसे परिणामोन्मुखी बनाया जाए, ताकि वरिष्ठ नागरिकों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

    अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक समाज की मजबूत धरोहर हैं और उनके सम्मानजनक, सुरक्षित व सक्रिय जीवन को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

    उन्होंने बताया कि प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं, आजीविका सुरक्षा, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक सशक्तिकरण से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती दी जा रही है।

    बैठक में जानकारी दी गई कि सदर उपमंडल के ओल्ड एज होम दियोली में आयोजित वर्कशॉप सफल रही है। आगामी वर्कशॉप 7 फरवरी को घुमारवीं डिग्री कॉलेज परिसर और 10 फरवरी को श्री नैना देवी जी उपमंडल के झंडूता ब्लॉक कार्यालय में आयोजित की जाएंगी।

    इसके बाद जिला स्तर पर तीन दिवसीय वर्कशॉप आयोजित की जाएगी।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ अपने अनुभव स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ साझा करेंगे।

    इस पहल को ‘टॉक एक्सचेंज’ नाम दिया गया है, जिसका उद्देश्य पीढ़ियों के बीच संवाद को मजबूत करना है।इसके अलावा प्रोटेक्टिव एजिंग कार्यक्रम के तहत बच्चों और किशोरों को वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए विभिन्न शैक्षणिक व जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

    अंत में अतिरिक्त उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने और वरिष्ठ नागरिकों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

  • पहाड़ की मेहनत ने तोड़ा नेट का दायरापुन्नरधार की सरीना ने यूजीसी नेट पास कर रचा मिसाल

    पहाड़ की मेहनत ने तोड़ा नेट का दायरापुन्नरधार की सरीना ने यूजीसी नेट पास कर रचा मिसाल

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    पुन्नरधार की एक साधारण बेटी ने असाधारण संकल्प के बल पर बड़ी शैक्षणिक सफलता हासिल की है। निरंतर प्रयास और कड़ी मेहनत के दम पर सरीना कुमारी ने वाणिज्य विषय में यूजीसी नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण कर रेणुका और राजगढ़ क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

    उनकी इस सफलता से न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।
    सरीना मूल रूप से नौहराधार तहसील के गांव पुन्नरधार की निवासी हैं। उनके पिता राजेन्द्र सिंह राजगढ़ बाजार में दुकान चलाते हैं, जबकि माता राधा देवी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में सेवाएं दे रही हैं।

    सीमित संसाधनों के बीच सरीना की यह उपलब्धि क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
    सरीना ने बताया कि उनका जीवन लक्ष्य वाणिज्य विषय में प्रोफेसर बनना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिना किसी कोचिंग के यूजीसी नेट परीक्षा की तैयारी की और सफलता की पहली बड़ी सीढ़ी पार की।

    शैक्षणिक सफर की बात करें तो सरीना ने वर्ष 2019 में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वर्ष 2022 में राजकीय महाविद्यालय राजगढ़ से बीकॉम की डिग्री हासिल की।

    आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से वर्ष 2025 में वाणिज्य विषय में स्नातकोत्तर डिग्री (एमकॉम) उत्तीर्ण की।
    सरीना की इस उपलब्धि पर शिक्षकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह परिणाम उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास का प्रतिफल है।

    शिक्षकों के अनुसार सरीना की सफलता अन्य विद्यार्थियों को भी उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

    सरीना की यूजीसी नेट में सफलता पर क्षेत्रवासियों, शुभचिंतकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार बधाइयां दी जा रही हैं। यह उपलब्धि साबित करती है कि मजबूत इरादों और निरंतर परिश्रम से पहाड़ी क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।

  • बिना कोचिंग शैलेन्द्र ने प्रथम प्रयास में पास की नेट परीक्षा

    बिना कोचिंग शैलेन्द्र ने प्रथम प्रयास में पास की नेट परीक्षा

    पझौता घाटी के युवक की सफलता, संगीत में सहायक प्रोफेसर बनने का सपना

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    राजगढ़ उपमंडल की पझौता घाटी के लिए यह गर्व का क्षण है। क्षेत्र के गांव मानवा निवासी शैलेन्द्र हितैषी ने बिना किसी कोचिंग के प्रथम प्रयास में राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण कर समूची घाटी का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी की लहर है।

    शैलेन्द्र हितैषी ने बताया कि उन्होंने नेट परीक्षा की तैयारी पूरी तरह स्वअध्ययन के माध्यम से की। किसी भी कोचिंग संस्थान की सहायता लिए बिना घर पर नियमित अध्ययन और अनुशासन के साथ तैयारी कर यह सफलता हासिल की।

    शैलेन्द्र मूल रूप से राजगढ़ उपमंडल की पझौता घाटी के गांव मानवा के निवासी हैं। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा आठवीं तक अपने पैतृक गांव मानवा से प्राप्त की। इसके बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला राजगढ़ से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने राजगढ़ डिग्री कॉलेज से पूरी की।

    संगीत के प्रति शैलेन्द्र की रुचि बचपन से रही है। उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपनी माता मीरा हितैषी से मिली, जो आकाशवाणी से अनुमोदित पहाड़ी कलाकार रह चुकी हैं। उनके पिता सुखदेव हितैषी पेशे से किसान हैं।

    कॉलेज शिक्षा के दौरान भी शैलेन्द्र ने संगीत विषय को अनिवार्य रूप से चुना। स्नातक के बाद वह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संगीत में एमए कर रहे हैं। नेट परीक्षा में सफलता का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार के सहयोग के साथ-साथ राजगढ़ कॉलेज की संगीत प्रोफेसर डॉ. सविता सहगल और नीरजा सहगल को दिया है।

    शैलेन्द्र ने बताया कि उनका सपना संगीत विषय में सहायक प्रोफेसर बनना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने दिन-रात मेहनत कर नेट परीक्षा उत्तीर्ण की। आगे उनका उद्देश्य संगीत में पीएचडी कर सिरमौर की प्राचीन संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों के संरक्षण के लिए कार्य करना है।

  • असेंशियल ड्रग्स लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने के निर्देश

    असेंशियल ड्रग्स लिस्ट को नए सिरे से तैयार करने के निर्देश

    सीएम सुक्खू का फैसला: अब दवाओं की खरीद सीधे निर्माता कंपनियों से

    हिमाचल नाऊ न्यूज | शिमला

    सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को बेहतर और भरोसेमंद दवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

    मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को नई आवश्यक औषधि सूची यानी असेंशियल ड्रग्स लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस नई सूची का मूल्यांकन एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा किया जाएगा, ताकि मरीजों की जरूरतों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण दवाओं को शामिल किया जा सके।

    साथ ही दवाओं की खरीद प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अब सीधे निर्माता कंपनियों से दवा खरीदने की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके लिए आवश्यक नियमों और प्रावधानों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सीएम सुक्खू ने सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आपूर्ति की जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रणाली को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में दवाओं की सैंपलिंग और जांच के लिए अलग सैल स्थापित किया जाएगा।

    इन सैलों के लिए पर्याप्त स्टाफ, आधुनिक उपकरण और प्रशिक्षण की व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।
    पहले चरण में यह सैल आईजीएमसी शिमला और टीएमसी कांगड़ा में शुरू किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि हिमाचल प्रदेश में दवा निर्माता कंपनियों द्वारा तैयार की जा रही दवाओं की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाए।

    इसके लिए औषधि एवं प्रसाधन सामग्री नियम, 1945 की अनुसूची-एम के प्रावधानों को पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा।

    बैठक में सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, विशेष सचिव अश्विनी कुमार, निदेशक आयुष निपुण जिंदल, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

  • चौपाल–पांवटा साहिब मार्ग पर HRTC बस हादसा, 3 की मौत, 32 यात्री थे सवार

    चौपाल–पांवटा साहिब मार्ग पर HRTC बस हादसा, 3 की मौत, 32 यात्री थे सवार

    उत्तराखंड के क्वाणु में पास लेते समय डंगा बैठने से गहरी खाई में गिरी बस

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ चौपाल

    चौपाल से वाया उत्तराखंड पांवटा साहिब जा रही हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की एक बस उत्तराखंड के क्वाणु क्षेत्र में पास लेते समय डंगा बैठने के कारण अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई।

    इस दर्दनाक हादसे में अब तक 3 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि कई यात्री घायल बताए जा रहे हैं।
    कंडक्टर से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में लगभग 32 यात्री सवार थे।

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    घटना की सूचना मिलते ही शिमला और सिरमौर से HRTC के अधिकारियों का दल घटनास्थल के लिए रवाना हो गया। वहीं चौपाल से एसडीएम, डीएसपी और आरटीओ नाहन को भी मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। राहत एवं बचाव कार्य के लिए उत्तराखंड प्रशासन से भी सहयोग लिया जा रहा है।

    सीएम सुक्खू और डिप्टी सीएम अग्निहोत्री ने जताया शोक, हरसंभव सहायता के निर्देश

    हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जिला सिरमौर के अधिकारियों को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा शोक व्यक्त किया है।

    मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों तथा घायलों को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश देते हुए घायलों के समुचित इलाज का भरोसा दिलाया है। प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है, वहीं हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है।

  • सिरमौर की ‘सुपर मॉम और बेटे’ ने गोल्ड मेडल जीत देश में लहराया परचम

    सिरमौर की ‘सुपर मॉम और बेटे’ ने गोल्ड मेडल जीत देश में लहराया परचम

    नाहन :

    कहते हैं कि प्रतिभा विरासत में मिलती है और नाहन के एक परिवार ने इस बात को सच कर दिखाया है। खेल जगत में हिमाचल प्रदेश के एक मां और बेटे की जोड़ी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

    जिस वक्त बेटा उत्तराखंड के देहरादून में मार्शल आर्ट के दांव-पेंचों से प्रतिद्वंद्वियों को पस्त कर गोल्ड मेडल जीता। ठीक उसी समय मां पुणे में नेशनल मास्टर्स गेम्स में प्रदेश का परचम लहरा रही थीं।

    बात हो रही हैअंतरराष्ट्रीय एथलीट सीमा परमार और उनके 17 वर्षीय बेटे समरवीर सिंह रोहिला की, जिन्होंने अपनी उपलब्धियों से न केवल सिरमौर, बल्कि पूरे हिमाचल का नाम रोशन किया है।

    देहरादून में आयोजित तीसरी ऑल इंडिया पेंचक सिलट मार्शल आर्ट प्रतियोगिता में समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इस नेशनल इवेंट में 1200 से अधिक खिलाड़ियों के बीच समरवीर की यह जीत बेहद खास रही।

    हिमाचल की टीम ने पेंचक सिलट प्रतियोगिता में कुल 10 पदक जीते, जिसमें सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इनमें से 8 पदक अकेले सिरमौर जिले के खिलाड़ियों ने झटके।

    पेंचक सिलट प्रतियोगिता में सिरमौर जिले के समरवीर सिंह रोहिला ने जूनियर वर्ग में गोल्ड, मंडी जिले की किरत कमल कौर ने सब जूनियर वर्ग में सिल्वर, सिरमौर की सहना ने जूनियर वर्ग में ने सिल्वर, सिरमौर की बियनका तनेजा मकन वर्ग में (7 से 9 वर्ष आयु वर्ग) में सिल्वर, जबकि नविका शर्मा ने प्री टीन वर्ग में सिल्वर मेडल जीते।

    इसके अलावा मंडी के अर्श वैद्य ने प्री टीन वर्ग में सिल्वर, सिरमौर की तृषि वर्मा ने प्री टीन वर्ग में ब्रॉन्ज, सिरमौर की देवांशी पाठे ने प्री टीन वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल व सिरमौर के मनन चौहान ने मकन वर्ग में ब्रॉन्ज मेडल जीते।वहीं दूसरी ओर पुणे में आयोजित 8वीं नेशनल मास्टर्स गेम्स में उनकी मां सीमा परमार ने 50 प्लस आयु वर्ग में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।

    सीमा परमार ने हैमर थ्रो में स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा बैडमिंटन, डिस्कस थ्रो व वॉलीबॉल जैसी स्पर्धाओं में भी अपना जलवा दिखाते हुए पदक हिमाचल के खाते में डाले।

    इसमें एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक शामिल है।दिलचस्प बात है कि खेल जगत में हिमाचल से मां-बेटे की यह अपनी तरह की पहली उपलब्धि हो सकती है, जब एक ही समय में देश के अलग-अलग कोनों में मां-बेटे ने न केवल देवभूमि का नाम गौरवांवित किया, बल्कि सही मायनों में सिरमौर के अर्थ को चरितार्थ किया है।

  • ददाहू भूमि विवाद में कोर्ट का बड़ा फैसला, वादी के कब्जे को मिली कानूनी सुरक्षा

    ददाहू भूमि विवाद में कोर्ट का बड़ा फैसला, वादी के कब्जे को मिली कानूनी सुरक्षा

    नाहन कोर्ट ने प्रतिवादी को हस्तक्षेप से रोका, स्थायी निषेधाज्ञा मंजूर

    हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

    ददाहू क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद में नाहन की सीनियर सिविल जज उपासना शर्मा की अदालत ने स्पष्ट और अहम फैसला सुनाते हुए वादी के कब्जे को कानूनी संरक्षण प्रदान किया है।

    अदालत ने प्रतिवादी को विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से रोकते हुए स्थायी निषेधाज्ञा जारी की है।अदालत के समक्ष वादी रमेश कुमार ने याचिका दायर कर बताया था कि वह मौजा चुली ददाहू, तहसील ददाहू स्थित खाता-खतौनी नंबर 387/537, खसरा नंबर 480/395/16 व 974/869, कुल रकबा 00-02-04 बीघा भूमि का मालिक व कब्जाधारी है।

    म्यूटेशन दर्ज होने के बाद पुराने जर्जर मकान को गिराकर नए निर्माण की तैयारी की जा रही थी।वादी के अनुसार, भूमि से सटी जमीन के मालिक प्रतिवादी योगिंदर दत्त ने 12 अक्टूबर 2021 और 20 अक्टूबर 2021 को बिना किसी अधिकार के भूमि में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया और रिटेनिंग वॉल बनाने की मंशा जताई,

    जिससे वादी को बेदखली का खतरा उत्पन्न हो गया।अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद जमाबंदी का अवलोकन करते हुए कहा कि वादी का नाम विधिवत दर्ज है और स्वामित्व व कब्जा प्रमाणित होता है।

    प्रतिवादी द्वारा वादी के अधिकारों को चुनौती देने के बावजूद कोई ठोस दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।कोर्ट ने माना कि वादी ने भूमि में हस्तक्षेप और हस्तक्षेप की मंशा को सफलतापूर्वक सिद्ध किया है, जिसके चलते वह स्थायी निषेधाज्ञा पाने का अधिकारी है।

    हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि पर किसी निर्माण या अतिक्रमण का प्रत्यक्ष प्रमाण रिकॉर्ड पर नहीं है, इसलिए अनिवार्य निषेधाज्ञा का दावा स्वीकार नहीं किया गया।

    अदालत ने अपने आदेश में प्रतिवादी को निर्देश दिए कि वह भविष्य में विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करे। मामले में किसी भी पक्ष पर लागत नहीं डाली गई। फैसला 16 जनवरी 2026 को खुले न्यायालय में सुनाया गया।