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  • कांग्रेस सरकार की नीतियों से डगमगाई प्रदेश की अर्थव्यवस्था : विनय गुप्ता

    कांग्रेस सरकार की नीतियों से डगमगाई प्रदेश की अर्थव्यवस्था : विनय गुप्ता

    बढ़ते कर्ज और राजस्व घाटे को लेकर सरकार पर साधा निशाना

    हिमाचल नाऊ न्यूज नाहन

    शिमला। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता विनय गुप्ता ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि हिमाचल प्रदेश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के लिए पूरी तरह कांग्रेस सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि बढ़ता कर्ज, लगातार बढ़ रहा राजस्व घाटा और वित्तीय कुप्रबंधन राज्य को गंभीर आर्थिक संकट की ओर धकेल रहा है।

    विनय गुप्ता ने कहा कि अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए प्रदेश सरकार बार-बार केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है, जबकि आर्थिक चुनौतियों के संकेत पहले से स्पष्ट थे।

    राजस्व घाटा अनुदान में कमी पूर्व निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा थी, इसके बावजूद सरकार आय के नए स्रोत विकसित करने और निवेश आकर्षित करने में विफल रही।

    उन्होंने कहा कि जब प्रदेश आर्थिक दबाव में है, तब राजनीतिक नियुक्तियों, सलाहकारों और अनावश्यक खर्चों में बढ़ोतरी चिंताजनक है। सरकार को फिजूलखर्ची पर तुरंत रोक लगाकर वित्तीय अनुशासन लागू करना चाहिए।

    भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हिमाचल पर लगातार बढ़ता कर्ज आने वाली पीढ़ियों पर भारी बोझ बनेगा। उन्होंने सरकार से आर्थिक नीतियों की गंभीर समीक्षा कर ठोस सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।

    केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए विनय गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार विकास, आधारभूत संरचना और आर्थिक सुदृढ़ीकरण पर निरंतर कार्य कर रही है। हिमाचल प्रदेश को विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से भरपूर सहयोग दिया गया है और भविष्य में भी विकास के लिए केंद्र प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार को आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति छोड़कर प्रदेशहित में निर्णय लेने चाहिए, क्योंकि जनता अब वास्तविक स्थिति को भली-भांति समझ चुकी है।

  • शिक्षा विभाग में छुट्टियों पर ब्रेक, बजट सत्र तक अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी

    शिक्षा विभाग में छुट्टियों पर ब्रेक, बजट सत्र तक अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी

    16 फरवरी से विधानसभा सत्र, सुबह 8 से रात 8 बजे तक ड्यूटी के निर्देश

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    16 फरवरी से शुरू हो रहे हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रस्तावित छुट्टियों और टूर कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

    जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सत्र की अवधि तक सभी अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। विधानसभा कार्य से जुड़े अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    आवश्यकता पड़ने पर रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी कार्यालय बुलाया जा सकता है।विभाग ने कहा है कि विधानसभा में शिक्षा से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर समय पर और पूर्ण रूप से तैयार रखे जाएं।

    अधिकारियों को विभाग से संबंधित अद्यतन आंकड़े उपलब्ध रखने होंगे। विशेष रूप से पिछले तीन वर्षों की नई भर्तियां, पदोन्नतियां, सेवानिवृत्तियां, रिक्त पदों की स्थिति और शिक्षकों के तबादलों का पूरा ब्योरा तैयार रखने को कहा गया है।आदेशों में चेतावनी दी गई है कि विधानसभा कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    बजट सत्र समाप्त होने तक शिक्षा विभाग के कार्यालयों के लैंडलाइन और अधिकारियों के मोबाइल फोन कार्य दिवसों के साथ-साथ अवकाश के दौरान भी चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • रेणुका में विनय कुमार की राहें कठिन, कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए कई स्थानीय नेता

    रेणुका में विनय कुमार की राहें कठिन, कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए कई स्थानीय नेता

    लाना चेता गांव में भाजपा बैठक के दौरान बदला सियासी समीकरण

    हिमाचल नाऊ न्यूज – श्री रेणुका जी

    रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के लिए सियासी चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं। क्षेत्र में लंबे समय से जमी कांग्रेस की पकड़ को झटका देते हुए नौहराधार क्षेत्र के लाना चेता गांव में कांग्रेस से जुड़े कई स्थानीय नेता और कार्यकर्ता भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं,

    जिससे स्थानीय विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की राहें कठिन मानी जा रही हैं।यह राजनीतिक घटनाक्रम सिरमौर जिला भाजपा अध्यक्ष धीरज गुप्ता की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान सामने आया, जहां यशवंत सिंह, सुरेंद्र सिंह और परमार सिंह ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस पार्टी से नाता तोड़ते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की।

    इन नेताओं ने कांग्रेस की नीतियों से असंतोष जताते हुए भाजपा की विचारधारा में विश्वास व्यक्त किया।भाजपा में शामिल हुए नेताओं का कहना है कि हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार की नीतियों और रेणुका क्षेत्र में ठप पड़े विकास कार्यों के कारण वे कांग्रेस से निराश थे।

    उनका आरोप है कि क्षेत्र में विकास की रफ्तार पूरी तरह थमी हुई है, जिससे आम जनता और कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है।नेताओं ने यह भी कहा कि पिछले करीब पांच दशकों से क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।

    पहले डॉ. प्रेम सिंह और अब विनय कुमार के कार्यकाल में क्षेत्र को विकास के नाम पर कुछ खास नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें कांग्रेस पार्टी के भीतर घुटन महसूस हो रही थी और विकास की उम्मीद में उन्होंने भाजपा का दामन थामा।

    इस मौके पर सिरमौर जिला भाजपा महासचिव रणबीर ठाकुर, जिला अनुसूचित जनजाति मोर्चा अध्यक्ष मोरध्वज चौहान, नोहराधार मंडल भाजपा अध्यक्ष भारत भूषण सहित अन्य भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

  • धौलाकुआँ में विद्यार्थियों को मिला बागवानी का व्यावहारिक प्रशिक्षण

    धौलाकुआँ में विद्यार्थियों को मिला बागवानी का व्यावहारिक प्रशिक्षण

    क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान केंद्र में प्री-वोकेशनल कार्यक्रम, बच्चों ने सीखी वैज्ञानिक खेती की बारीकियां

    हिमाचल नाऊ न्यूज – नाहन

    क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान केंद्र, धौलाकुआँ में विद्यार्थियों के लिए एक प्री-वोकेशनल एजुकेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें जिला सिरमौर के दो सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने भाग लिया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को बागवानी और कृषि से जुड़े व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना रहा।कार्यक्रम में सरकारी मध्य विद्यालय माशू के कक्षा 6 से 8 तक के 26 विद्यार्थी चार अध्यापकों के साथ शामिल हुए, जबकि सरकारी मध्य विद्यालय पभार के कक्षा 6 से 8 तक के 24 विद्यार्थी अपने शिक्षक के साथ प्रशिक्षण में पहुंचे।

    विद्यार्थियों को अनुसंधान केंद्र की गतिविधियों से सीधे तौर पर अवगत कराया गया।सह-निदेशक (अनुसंधान एवं विस्तार) डॉ. प्रियंका ठाकुर ने विद्यार्थियों को गेंदा, डहेलिया, जंगली शोभाकार पौधों और सर्दियों में उगाई जाने वाली पुष्पीय फसलों के बारे में सरल और रोचक तरीके से जानकारी दी।

    उन्होंने पौधों की पहचान, उनके महत्व, वृद्धि प्रक्रिया और बागवानी के मूल सिद्धांतों को समझाया। साथ ही अनुसंधान केंद्र में अपनाई जा रही आधुनिक वैज्ञानिक खेती की तकनीकों की जानकारी भी साझा की।

    डॉ. शिल्पा ने विद्यार्थियों को आम, लीची और ड्रैगन फ्रूट जैसी उपोष्णकटिबंधीय फसलों की खेती और उनके बगीचों की देखभाल के बारे में विस्तार से बताया। वहीं डॉ. सिमरन कश्यप ने फूलों और सजावटी पौधों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण देते हुए क्यारियों में सर्दियों के पौधों का रोपण और गमलों में पौधे लगाने की विधियां प्रत्यक्ष रूप से दिखाई।

    कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने न केवल सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त की, बल्कि स्वयं पौधारोपण और देखभाल की प्रक्रिया को अनुभव किया। विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें बागवानी और कृषि के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं और करियर विकल्पों के बारे में नई जानकारी मिली।

    कार्यक्रम का समापन प्रश्न-उत्तर और चर्चा सत्र के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से जिज्ञासाओं का समाधान पाया।

  • बजट सत्र ही होगा विधानसभा का आगामी सत्र, 16 फरवरी से शुरुआत

    बजट सत्र ही होगा विधानसभा का आगामी सत्र, 16 फरवरी से शुरुआत

    राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होगी कार्यवाही, पहले चरण में तीन दिन का सत्र तय

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा का आगामी सत्र बजट सत्र ही होगा। 16 फरवरी से शुरू होने वाले इस सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक में विधानसभा परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि यह सत्र नए कैलेंडर वर्ष और नए वित्तीय वर्ष का पहला सत्र है, इसलिए इसकी शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि 16 फरवरी को दोपहर 2 बजे राज्यपाल का अभिभाषण होगा।विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद, नियमों के अनुसार यदि पिछले सत्र के दौरान किसी माननीय सदस्य का निधन हुआ है, तो उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।

    इसके उपरांत विधायी कार्यवाही आरंभ होगी। बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्तुति सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य संपन्न होंगे।कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सत्र के पहले चरण में 16, 17 और 18 फरवरी को विधानसभा की तीन बैठकें प्रस्तावित हैं।

    बजट पेश करने की तिथि को लेकर सरकार की ओर से औपचारिक सूचना मिलते ही मीडिया को अवगत कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि विधानसभा का पोर्टल सभी माननीय विधायकों के लिए खोल दिया गया है।

    विधायक लिखित और मौखिक प्रश्नों सहित सभी प्रकार के नोटिस भेज सकते हैं। नोटिस प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तय समय सीमा पूरी होने के बाद सत्र से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। विधानसभा की ओर से 15 फरवरी को मीडिया इंटरैक्शन भी आयोजित किया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हर सत्र से पहले कानून व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है।

    बजट सत्र के दौरान सुरक्षा, नियमों के पालन, मीडिया प्रतिनिधियों और आगंतुकों की पास व्यवस्था सहित सभी आवश्यक प्रबंधों को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

  • प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नरेश वर्मा एचआरटीसी के कार्यकारी निदेशक, संजीव गांधी मिल्कफेड के एमडी

    प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नरेश वर्मा एचआरटीसी के कार्यकारी निदेशक, संजीव गांधी मिल्कफेड के एमडी

    एचएएस–आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां, एचआरटीसी और मिल्कफेड में बदले नेतृत्व और सिरमौर में…

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    प्रदेश सरकार ने एचएएस और आईपीएस अधिकारियों के स्तर पर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कई अहम पदों पर नई नियुक्तियां और तबादले किए हैं। कार्मिक विभाग द्वारा जारी आदेशों के तहत परिवहन, प्रशासन और सार्वजनिक उपक्रमों में बदलाव किया गया है।

    अतिरिक्त निदेशक तकनीकी शिक्षा विभाग सुंदरनगर नरेश कुमार वर्मा को वहां से तबदील कर हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया गया है।

    नरेश वर्मा इस अतिरिक्त कार्यभार से नगर निगम शिमला के संयुक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा को भारमुक्त करेंगे, जो लंबे समय से एचआरटीसी का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे थे।

    इसी क्रम में एसडीएम सिविल शिलाई जसपाल को एसडीएम सिविल कफोटा का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। वहीं नियुक्ति की प्रतीक्षा में रहे जगदीप सिंह को एसडीएम सिविल निरमंड के पद पर तैनाती दी गई है। वह मनमोहन सिंह का स्थान लेंगे, जिन्हें सरकार ने कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।

    इसके अलावा एसडीएम कफोटा ओम प्रकाश को वहां से तबदील कर पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात किया गया है। साथ ही सरकार ने रमन घरसंघी, अतिरिक्त निदेशक मेडिकल कॉलेज चंबा के तबादला आदेशों को रद्द कर दिया है।

    उधर, प्रदेश सरकार ने आईपीएस अधिकारी संजीव गांधी को हिमाचल प्रदेश मिल्कफेड का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया है। उनकी सेवाओं को कार्मिक विभाग के अधीन लाते हुए मिल्कफेड में एमडी के रूप में तैनाती के आदेश जारी किए गए हैं।

    संजीव गांधी इससे पहले शिमला के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और हाल ही में पदोन्नति के बाद डीआईजी रैंक पर पहुंचे हैं।
    संजीव गांधी की नियुक्ति के साथ ही वन सेवा के अधिकारी राजेश शर्मा को मिल्कफेड के अतिरिक्त कार्यभार से भारमुक्त कर दिया गया है।

  • राजगढ़ में तीन आरोपी चिट्टा सहित गिरफ्तार, 1.66 ग्राम हेरोइन बरामद

    राजगढ़ में तीन आरोपी चिट्टा सहित गिरफ्तार, 1.66 ग्राम हेरोइन बरामद

    हिमाचल नाऊ न्यूज राजगढ़

    पुलिस थाना राजगढ़, जिला सिरमौर की टीम ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए तीन व्यक्तियों को हेरोइन/चिट्टा सहित गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 1.66 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया है।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कशिश भरोटा निवासी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी संजौली, शिमला, रूब्बल जदेईक निवासी गांव पंडरोग तथा निक्षित चौहान निवासी गांव पुडग, तहसील कोटखाई, जिला शिमला के रूप में हुई है।
    पुलिस चौकी पझौता, थाना राजगढ़ की टीम ने 8 फरवरी को गश्त के दौरान गुप्त सूचना के आधार पर शरगांव के पास एक वाहन संख्या HP-99-8880 को रोका। तलाशी के दौरान वाहन में सवार तीनों व्यक्तियों के कब्जे से 1.66 ग्राम हेरोइन/चिट्टा बरामद किया गया।

    इस मामले में पुलिस थाना राजगढ़ में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 व 29 के तहत अभियोग दर्ज किया गया है। मामले की जांच जारी है।

    मामले की पुष्टि करते हुए जिला सिरमौर के पुलिस अधीक्षक निश्चिंत सिंह नेगी ने बताया कि नशे के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है और ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

  • लोकगीतों के सुरों में सिरमौर की संस्कृति को संजो रहे हैं राजेश धाल्टा

    लोकगीतों के सुरों में सिरमौर की संस्कृति को संजो रहे हैं राजेश धाल्टा

    पांच वर्षों से पारंपरिक लोकसंगीत के संरक्षण में जुटे युवा कलाकार, मंच से अकादमिक दुनिया तक बना रहे पहचान

    हिमाचल नाऊ न्यूज – राजगढ़

    तेजी से बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में जब लोकसंगीत आधुनिक धुनों की भीड़ में पीछे छूटता नजर आ रहा है, ऐसे समय में सिरमौर की पारंपरिक संस्कृति को सहेजने का जिम्मा एक युवा कलाकार ने अपने कंधों पर उठा लिया है।

    राजगढ़ क्षेत्र से जुड़े राजेश धाल्टा आज सिरमौर के उन चुनिंदा कलाकारों में शुमार हो चुके हैं, जो लोकगीतों के संरक्षण और संवर्धन को एक सतत सांस्कृतिक अभियान का रूप दे रहे हैं।

    सांस्कृतिक मंचों पर राजेश धाल्टा की सुरीली आवाज जब गूंजती है, तो श्रोता सिर्फ गीत नहीं सुनते, बल्कि सिरमौर की मिट्टी, उसकी लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ जाते हैं। यही कारण है कि उनकी प्रस्तुति के दौरान बार-बार ‘वनसमोर’ की मांग सुनाई देती है।

    राजेश बीते करीब पांच वर्षों से सिरमौर जिले के पारंपरिक लोकगीतों की खोज, संकलन और मंचीय प्रस्तुति में सक्रिय हैं। उनका उद्देश्य मनोरंजन से आगे बढ़कर उन लोकगीतों को संरक्षित करना है, जो समय के साथ विलुप्त होने की कगार पर हैं।

    वे मानते हैं कि लोकगीत किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान होते हैं और इन्हें बचाना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है।

    राजेश धाल्टा आकाशवाणी और दूरदर्शन शिमला से अनुमोदित कलाकार हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय, जिला और ग्रामीण स्तर के मेलों में अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से सिरमौर की लोकसंस्कृति को व्यापक मंच दिया है।

    कम उम्र में ही उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में सिरमौर की संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत करने के अवसर मिले, जिससे जिले की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार मिला।

    राजेश मूल रूप से राजगढ़ से सटे कन्हैच गांव के निवासी हैं। संगीत उन्हें पारिवारिक विरासत में मिला है। उनके पिता सोहनलाल धाल्टा उच्च कोटि के बांसुरी और शहनाई वादक हैं, जबकि उनके चाचा विद्यादत्त धाल्टा ऑलराउंड कलाकार के रूप में पहचाने जाते हैं।

    ऐसे सांस्कृतिक वातावरण में पले-बढ़े राजेश के लिए संगीत जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बन गया।
    राजेश की प्रारंभिक शिक्षा मडियाघाट स्कूल में हुई। बचपन से ही वे पाठशाला स्तर की सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे और लगातार प्रथम स्थान हासिल करते रहे।

    पुरस्कारों से भरा उनका घर उनकी लगन और निरंतर अभ्यास की कहानी कहता है।
    उन्होंने राजगढ़ महाविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की, जहां प्रो. डॉ. सविता सहगल के मार्गदर्शन में संगीत की औपचारिक शिक्षा ग्रहण की। इसके बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से संगीत में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा को भी मजबूती दी।

    राजेश धाल्टा का सपना केवल मंच तक सीमित नहीं है। वे संगीत विषय में प्रोफेसर बनकर लोकसंगीत को अकादमिक पहचान दिलाना चाहते हैं। इसके लिए वे निरंतर मेहनत कर रहे हैं और संगीत में पीएचडी करना उनका दीर्घकालीन लक्ष्य है। उनका मानना है कि लोकसंगीत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए बिना उसका स्थायी संरक्षण संभव नहीं है।

    राजेश अपने पिता सोहनलाल और चाचा विद्यादत्त धाल्टा के साथ युगलवंदी में कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, जो दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। इसके साथ-साथ वे हारमोनियम, ढोलक, तबला और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों में भी दक्षता रखते हैं।

    सोहनलाल धाल्टा द्वारा स्थापित ‘धाल्टा कला मंच’ के तहत एक पहाड़ी बैंड भी सक्रिय है, जिसमें परिवार से जुड़े कलाकारों की प्रमुख भागीदारी है। इस बैंड की मांग सिरमौर के साथ-साथ सोलन और शिमला जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रही है, जिससे स्थानीय कलाकारों को मंच और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

    लोकगीतों के माध्यम से संस्कृति को संजोने की राजेश धाल्टा की यह साधना आज नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनती जा रही है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से ही सांस्कृतिक विकास संभव है।

  • RDG बंद होने पर सुक्खू सरकार जाएगी कोर्टमुख्यमंत्री बोले—हिमाचल के विकास से समझौता नहीं होगा

    RDG बंद होने पर सुक्खू सरकार जाएगी कोर्टमुख्यमंत्री बोले—हिमाचल के विकास से समझौता नहीं होगा

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ शिमला

    रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) बंद होने से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों को देखते हुए सुक्खू सरकार ने राजनीतिक लड़ाई के साथ-साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।

    सरकार का कहना है कि RDG समाप्त होने से राज्य की विकास योजनाएं, कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और विभिन्न सब्सिडी योजनाएं सीधे तौर पर प्रभावित होंगी।

    मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक के बाद वित्त विभाग ने RDG के प्रभावों को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस प्रेजेंटेशन में RDG बंद होने से राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले असर को आंकड़ों के साथ रखा गया।

    वित्त विभाग के अनुसार हिमाचल सरकार को सालाना खर्च पूरे करने के लिए करीब 48 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। सरकार अपने संसाधनों से लगभग 42 हजार करोड़ रुपये जुटा लेती है, इसके बावजूद करीब 6 हजार करोड़ रुपये का वार्षिक घाटा बना रहता है। ऐसे में RDG बंद होने से यह वित्तीय अंतर और गहरा सकता है।

    मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि RDG का बंद होना हिमाचल प्रदेश के विकास को सीधे प्रभावित करेगा। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि सरकार विकास कार्यों को प्रभावित नहीं होने देगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई है और राज्य सरकार इसे हर स्तर पर लड़ेगी।
    मुख्यमंत्री ने विपक्ष से भी अपील की कि इस मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के समक्ष हिमाचल का पक्ष मजबूती से रखा जाए।

    उन्होंने बताया कि इस विषय पर विपक्षी विधायकों को भी वित्त विभाग की प्रेजेंटेशन में आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनका शामिल न होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

    नगर नियोजन एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि RDG बंद होने से राज्य की कई अहम विकास परियोजनाएं रुक सकती हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी योजनाओं पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा, जिसे सरकार किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेगी।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि RDG को लेकर राज्य के हितों की रक्षा के लिए कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ी जाएगी।

  • रक्षा मंत्री के पत्र से छावनी क्षेत्रों के नागरिकों को बड़ी राहत

    रक्षा मंत्री के पत्र से छावनी क्षेत्रों के नागरिकों को बड़ी राहत

    छावनी परिषदों के नागरिक हिस्से नगर निकायों में होंगे शामिल, प्रक्रिया तेज

    हिमाचल नाऊ नई दिल्ली

    देशभर की छावनी परिषदों से जुड़े नागरिक क्षेत्रों को अलग कर नजदीकी नगर निकायों में शामिल करने की प्रक्रिया को लेकर रक्षा मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आधिकारिक पत्र से यह स्पष्ट हुआ है कि इस लंबे समय से लंबित मुद्दे पर केंद्र सरकार ने ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है।

    रक्षा मंत्री ने जानकारी दी है कि छावनी परिषदों के नागरिक हिस्सों को अलग करने और उन्हें नगर निकायों में विलय करने की कार्यप्रणाली को अंतिम रूप देने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 38 छावनियों के लिए समितियों का गठन किया है।

    इन समितियों में सभी संबंधित विभागों और पक्षों को शामिल किया गया है।पत्र के अनुसार 37 छावनियों के नागरिक क्षेत्रों को अलग करने के प्रस्ताव संबंधित राज्य सरकारों को सहमति के लिए भेजे जा चुके हैं।

    इनमें हिमाचल प्रदेश की सभी छह छावनियां भी शामिल हैं। अब इन प्रस्तावों पर राज्य सरकारों की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है।रक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान में छावनी परिषदों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, स्वच्छता, सड़क, गलियां और सड़क प्रकाश जैसी नागरिक सुविधाएं लगातार उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

    साथ ही ई-छावनी पोर्टल के जरिए कई सेवाएं ऑनलाइन भी दी जा रही हैं।रक्षा मंत्रालय के अनुसार नागरिक क्षेत्रों के नगर निकायों में विलय से छावनी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन,

    शहरी विकास योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा। इसे छावनी क्षेत्रों के नागरिकों की वर्षों पुरानी मांगों के समाधान की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है।