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टांडा मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय आपातकालीन जीवन रक्षक सहायता पैरामेडिक्स प्रथम बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 9 Hours Ago • 1 Min Read

टांडा मेडिकल कॉलेज में 14 से 16 जुलाई तक राष्ट्रीय आपातकालीन जीवन रक्षक सहायता (नेशनल इमरजेंसी लाइफ सेविंग सपोर्ट) पैरामेडिक्स प्रथम बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में 108 एम्बुलेंस सेवा, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियन, रेडियोग्राफर, ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन और स्वयंसेवकों को आधुनिक सिमुलेशन तकनीक के माध्यम से आपातकालीन जीवन रक्षक कौशलों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

धर्मशाला

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का हुआ आयोजन

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में 14 जुलाई से 16 जुलाई तक राष्ट्रीय आपातकालीन जीवन रक्षक सहायता (National Emergency Life Saving Support-NELS) पैरामेडिक्स प्रथम बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण उत्तर भारत की अत्याधुनिक हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन लैब में आयोजित किया गया, जहां प्रतिभागियों को आधुनिक प्रशिक्षण संसाधनों की सहायता से विभिन्न आपातकालीन परिस्थितियों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया।

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने पर रहा फोकस

हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह के इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन कोर्स डायरेक्टर डॉ. मोनिका पठानिया के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं नर्सिंग अधिकारियों की टीम द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं, प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य गंभीर चिकित्सा आपात स्थितियों में अग्रिम पंक्ति में कार्य करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों को जीवन रक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना था, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।

108 एम्बुलेंस कर्मियों सहित विभिन्न स्वास्थ्यकर्मियों ने लिया भाग

प्रशिक्षण कार्यक्रम में 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मियों, नर्सिंग स्टाफ, लैब तकनीशियनों, रेडियोग्राफरों, ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों तथा मानव सेवा से जुड़े स्वयंसेवकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को कार्डियक इमरजेंसी, ट्रॉमा प्रबंधन, प्राथमिक जीवन रक्षक सहायता, गंभीर मरीजों की प्रारंभिक देखभाल तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग से संबंधित विभिन्न विषयों पर सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की कार्यक्षमता को मजबूत करना भी रहा।

हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन और मॉक ड्रिल्स के माध्यम से कराया अभ्यास

प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन तकनीक, मॉक ड्रिल्स और वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न आपातकालीन स्थितियों का अनुभव कराया गया। इस दौरान उपलब्ध संसाधनों के उपयोग, त्वरित निर्णय क्षमता, टीमवर्क और समन्वय का भी मूल्यांकन किया गया। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को ऐसी परिस्थितियों में निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के अनुसार कार्य करने का प्रशिक्षण दिया, जिससे वास्तविक आपात स्थिति में समय पर और प्रभावी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

प्रदेशभर में नियमित रूप से होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम

कोर्स डायरेक्टर डॉ. मोनिका पठानिया ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन तैयार कर प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि हिमाचल प्रदेश के अधिक से अधिक पैरामेडिक्स, स्वास्थ्यकर्मियों और संबंधित कर्मचारियों को जीवन रक्षक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके तथा आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता को और बेहतर बनाया जा सके।

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