तीसा स्कूल में मुख्यमंत्री सुक्खू ने बच्चों से किया संवाद, लैब के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज पीएम श्री राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, तीसा में विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस दौरान बच्चों ने मुख्यमंत्री से उनकी पसंदीदा पढ़ाई, दिनचर्या और निजी जीवन से जुड़े कई दिलचस्प सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने बच्चों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि इस तरह के संवाद का उद्देश्य विद्यार्थियों के मन से झिझक दूर करना और उनमें सवाल पूछने की आदत विकसित करना है। इस अवसर पर उन्होंने स्कूल में लैब सुविधाओं के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा भी की।

तीसा
बच्चों की जिज्ञासा और आत्मविश्वास बढ़ाना संवाद का उद्देश्य
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि बच्चों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं, लेकिन कई बार वे झिझक के कारण उन्हें पूछ नहीं पाते। ऐसे संवाद का मकसद इसी झिझक को दूर करना और बच्चों को खुलकर अपनी बात रखने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को सवाल पूछने से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि जितने अधिक सवाल वे करेंगे, उनकी सोच उतनी ही विकसित होगी और आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी जिज्ञासाओं को खुलकर सामने रखने के लिए प्रेरित किया। संवाद के दौरान बच्चों ने मुख्यमंत्री से केवल पढ़ाई और शिक्षा से जुड़े सवाल ही नहीं पूछे, बल्कि उनकी दिनचर्या, पसंदीदा विषय और निजी जीवन के बारे में भी दिलचस्प सवाल किए। मुख्यमंत्री ने बच्चों के सवालों का सहजता से जवाब दिया और उनके साथ संवाद किया।

स्कूल की लैब के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पीएम श्री राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, तीसा में लैब सुविधाओं के विकास के लिए 3 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों ने स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अच्छे सुझाव दिए हैं। सरकार इन सुझावों को गंभीरता से लेगी और उन पर विचार करेगी।
विद्यार्थियों ने स्कूल की सुविधाओं को लेकर दिए सुझाव
संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने स्कूल की व्यवस्थाओं और सुविधाओं से संबंधित अपनी जरूरतों को भी मुख्यमंत्री के सामने रखा। बच्चों की ओर से दिए गए सुझावों को मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के विचार और सुझाव महत्वपूर्ण हैं। बच्चों के साथ इस तरह का सीधा संवाद उनकी आवश्यकताओं को समझने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में उपयोगी है।