फेडरल रिजर्व ने 2023 के बाद पहली बार बढ़ाईं ब्याज दरें, 25 बेसिस पॉइंट की वृद्धि
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बेंचमार्क ब्याज दरों में 0.25 फीसदी यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। 2023 के बाद यह पहला अवसर है जब केंद्रीय बैंक ने दरें बढ़ाई हैं। इस फैसले के बाद फेडरल फंड्स रेट का दायरा 3.75 फीसदी से 4.00 फीसदी हो गया है।
अमेरिका
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ने दो दिवसीय बैठक के बाद यह फैसला लिया। समिति के अनुसार, महंगाई का स्तर अब भी केंद्रीय बैंक के निर्धारित लक्ष्य से अधिक बना हुआ है। अगस्त में अमेरिका की उपभोक्ता महंगाई दर 3.4 फीसदी दर्ज की गई, जो जुलाई के बराबर थी, लेकिन फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी ऊपर रही। ब्याज दर बढ़ाने के प्रस्ताव को समिति में 12-0 मतों से मंजूरी मिली।
फेडरल रिजर्व ने अपने बयान में कहा कि अमेरिकी आर्थिक गतिविधियां मजबूत गति से आगे बढ़ रही हैं। घरेलू खर्च में मजबूती बनी हुई है, जबकि उत्पादकता और पूंजी निवेश में भी सकारात्मक स्थिति देखी जा रही है। मजबूत आर्थिक मांग के बीच कीमतों पर बने दबाव को नियंत्रित करने और मूल्य स्थिरता कायम रखने के उद्देश्य से केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों में वृद्धि का निर्णय लिया है।
महंगाई के दबाव पर फेड की नजर
अमेरिका में महंगाई पर कई कारकों का प्रभाव दिखाई दे रहा है। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव से ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई है। इसके साथ अमेरिकी टैरिफ नीतियों और मजबूत मांग ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े निवेश और उससे उत्पन्न मांग को भी महंगाई के दबाव का एक कारण माना जा रहा है। ऐसे में महंगाई को 2 फीसदी के लक्ष्य तक लाना फेड के लिए चुनौती बना हुआ है।
फेड ने संकेत दिया है कि आगे ब्याज दरों में होने वाला बदलाव आगामी आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगा। अमेरिकी दरों में बढ़ोतरी का प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी पड़ सकता है। भारत में शेयर बाजार, विदेशी निवेश और रुपये की चाल पर इसका असर दिखाई दे सकता है, क्योंकि ऊंची अमेरिकी दरें निवेशकों को अमेरिकी परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित कर सकती हैं और उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी प्रवाह पर दबाव डाल सकती हैं।