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रूसी तेल खरीद पर 100% टैरिफ का रास्ता खुला, अमेरिकी सदन से बिल पास; भारत-चीन पर पड़ सकता है असर

हिमाचलनाउ डेस्क • 5 Hours Ago • 1 Min Read

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस से तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने वाला विधेयक पारित कर दिया है। इसके प्रावधान लागू होने पर भारत और चीन जैसे रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, विधेयक अपने आप किसी देश के उत्पादों पर टैरिफ लागू नहीं करता। कानून बनने और निर्धारित शर्तें पूरी होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस संबंध में कार्रवाई का अधिकार मिल सकता है।

अमेरिका

प्रतिनिधि सभा में बुधवार शाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को 262 के मुकाबले 159 वोटों से मंजूरी मिली। यह विधेयक अगस्त में अमेरिकी सीनेट से पारित हो चुका था और अब कानून बनने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। सदन में हुई चर्चा के दौरान भारत और चीन की पहचान रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के रूप में की गई, जिन पर प्रस्तावित टैरिफ प्रावधानों का असर पड़ सकता है।

रूसी पेट्रोलियम के प्रमुख आयातकों पर प्रावधान

विधेयक में रूसी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और बैंकिंग अधिकारियों के विरुद्ध प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने का प्रावधान है। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी पेट्रोलियम के पांच प्रमुख आयातकों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने के लिए अधिकृत किया गया है। प्रावधानों के अनुसार, रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखने वाले देशों को इस कार्रवाई के दायरे में लाया जा सकता है। विधेयक का उद्देश्य ऐसे व्यापारिक संबंधों पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।

कुछ देशों के लिए छूट की व्यवस्था

विधेयक में उन देशों के लिए छूट भी रखी गई है जो रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और जिन्होंने इस खरीद को घटाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। भारत और चीन रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं, इसलिए विधेयक के समर्थकों ने दोनों देशों को संभावित रूप से प्रभावित होने वाले प्रमुख बाजारों में गिना है। फिर भी किसी देश पर वास्तविक टैरिफ तभी लगेगा, जब अमेरिकी कार्यपालिका कानूनी शर्तों के तहत इसे लागू करेगी।

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