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US-India Relations / मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले अमेरिका का बड़ा फैसला, इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलने से बढ़ी चर्चा , भारत से रिश्तों पर उठे सवाल

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन II • 10 Hours Ago • 1 Min Read

US-India Relations / अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) का नाम बदलकर पुनः यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) करने की घोषणा की है। पेंटागन के अनुसार यह निर्णय ऐतिहासिक सैन्य पहचान और संस्थागत विरासत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन का कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार, संचालन व्यवस्था या क्षेत्रीय सुरक्षा मिशनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

वाशिंगटन

पेंटागन ने नाम परिवर्तन की घोषणा की

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड (INDOPACOM) का नाम बदलकर पुनः यूएस पैसिफिक कमांड (USPACOM) करने की घोषणा की है। यह कमान हवाई स्थित है और अमेरिकी सेना की सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सैन्य कमानों में शामिल मानी जाती है। इसके अधिकार क्षेत्र में प्रशांत महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और हिंद महासागर से जुड़े कई रणनीतिक क्षेत्र आते हैं। अमेरिकी नौसेना का सातवां बेड़ा (Seventh Fleet) भी इसी कमान के अंतर्गत संचालित होता है। पेंटागन के अनुसार नाम परिवर्तन प्रशासनिक और ऐतिहासिक कारणों से किया गया है तथा इससे कमान की परिचालन क्षमता, जिम्मेदारियों या क्षेत्रीय दायरे में कोई बदलाव नहीं होगा।

ऐतिहासिक पहचान बहाल करने का तर्क

पेंटागन ने कहा है कि यह कदम द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित हुई सैन्य परंपराओं और संस्थागत विरासत को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार यूएस पैसिफिक कमांड नाम कई दशकों तक अमेरिकी सैन्य ढांचे का हिस्सा रहा है और इसे पुनः लागू करने का उद्देश्य ऐतिहासिक पहचान को बहाल करना है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नाम परिवर्तन केवल संगठनात्मक स्तर का निर्णय है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति, सैन्य तैनाती, साझेदार देशों के साथ सहयोग या मौजूदा अभियानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

2018 में किया गया था नाम परिवर्तन

वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान यूएस पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड किया गया था। उस समय तत्कालीन रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा था कि यह बदलाव हिंद महासागर और प्रशांत महासागर क्षेत्र की परस्पर जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को प्रतिबिंबित करता है। साथ ही इसे भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में उसकी भागीदारी की मान्यता के रूप में भी देखा गया था। इंडो-पैसिफिक अवधारणा पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका की विदेश और सुरक्षा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसके तहत हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक साझा रणनीतिक क्षेत्र के रूप में देखा जाता है।

क्वाड और क्षेत्रीय सहयोग पर बनी रहेगी नजर

अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच स्थापित क्वाड (QUAD) समूह का प्रमुख फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, उभरती प्रौद्योगिकियों और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना रहा है। ऐसे में कमान के नाम में बदलाव को लेकर रणनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि क्वाड, क्षेत्रीय साझेदारियों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़ी अमेरिकी नीतियों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार कमान का संचालन क्षेत्र, सैन्य संसाधन और सहयोगी देशों के साथ समन्वय पहले की तरह जारी रहेगा।

जी7 सम्मेलन के दौरान बढ़ा विषय का महत्व

यह निर्णय ऐसे समय सामने आया है जब फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। भारत और अमेरिका के बीच भी व्यापार, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है। इसी कारण कमान के नाम परिवर्तन को लेकर विभिन्न स्तरों पर विश्लेषण किया जा रहा है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक रूप से इस निर्णय को किसी विशेष देश, हालिया कूटनीतिक घटनाक्रम या द्विपक्षीय संबंधों से जोड़ने से इनकार किया है।

रणनीतिक विश्लेषकों की नजर

रक्षा और विदेश नीति से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी सैन्य कमान के नाम में बदलाव प्रतीकात्मक महत्व रख सकता है, लेकिन वास्तविक प्रभाव का आकलन उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं, सैन्य तैनाती, बजट आवंटन और क्षेत्रीय गतिविधियों के आधार पर किया जाता है। विश्लेषकों के अनुसार इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक व्यापार, समुद्री मार्गों और सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है तथा अमेरिका की क्षेत्रीय उपस्थिति भी जारी है। फिलहाल पेंटागन ने दोहराया है कि कमान के मिशन, संचालन क्षेत्र, सैन्य जिम्मेदारियों और सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा साझेदारी में किसी प्रकार का परिवर्तन प्रस्तावित नहीं है।