Himachalnow / मंडी
विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग के 1,393 टेंडरों का रिकॉर्ड लिया कब्जे में
जल शक्ति विभाग के बग्गी कार्यालय पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों की जांच में हिमाचल प्रदेश का राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) सक्रिय हो गया है। विजिलेंस ने 1,393 टेंडरों का रिकॉर्ड कब्जे में लेकर इसकी गहनता से जांच शुरू कर दी है। इस मामले में क्या सामने आया है, आइए जानते हैं विस्तार से।
विजिलेंस की जांच का फोकस
विजिलेंस ने इन टेंडरों के रिकॉर्ड को खंगालना शुरू कर दिया है। जांच के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
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- संदिग्ध टेंडरों की पहचान: इन टेंडरों के संदिग्ध होने का पता लगाकर उनसे संबंधित रिकॉर्ड तलब किया जाएगा।
- डाटा विश्लेषण: अनुमानित लागत, टेंडरों की स्वीकृत लागत, और उन्हें किसे आवंटित किया गया, इन सभी जानकारियों को विस्तार से देखा जाएगा।
- अधिकारियों की भूमिका: विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी, खासतौर पर उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के संदर्भ में।
ठेकेदार की शिकायत से खुला मामला
सुंदरनगर के एक ठेकेदार द्वारा विजिलेंस को जल शक्ति विभाग मंडल कार्यालय बग्गी में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिकायत दी गई थी। शिकायत में निम्नलिखित बिंदुओं को उजागर किया गया:
- टेंडर आवंटन में अनियमितताएं।
- विभागीय अधिकारियों पर चहेतों को लाभ पहुंचाने के आरोप।
- बीते वित्तीय वर्ष में निविदा प्रक्रिया और बजटीय आवंटन पर सवाल।
इस शिकायत के बाद विजिलेंस टीम ने बग्गी स्थित कार्यालय में छापेमारी की थी। छापेमारी के बाद वहां तैनात अधिशाषी अभियंता का तबादला किया गया।
आगे की कार्रवाई
जांच के अगले चरण में, विजिलेंस टीम संदेहास्पद टेंडरों की हर जानकारी जुटाकर उनकी विस्तृत जांच करेगी। यदि अनियमितताएं पाई गईं, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- जांच के दौरान तथ्यों के आधार पर तत्कालीन अधिशाषी अभियंता को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
विजिलेंस का आधिकारिक बयान
प्रियंक गुप्ता, डीएसपी, विजिलेंस मंडी, ने कहा:
“जल शक्ति विभाग बग्गी कार्यालय के अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की नियमानुसार जांच की जा रही है। शक के दायरे में आने वाले टेंडरों का विस्तार से डाटा मंगवाया जाएगा। हर चीज का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।”
निष्कर्ष
इस जांच का उद्देश्य जल शक्ति विभाग में भ्रष्टाचार के मामलों का पर्दाफाश करना और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करना है। यदि इस जांच में ठोस सबूत मिलते हैं, तो हिमाचल प्रदेश में सरकारी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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