राज्यपाल ने गठित की कुलाधिपति अंतर-विश्वविद्यालयीय ‘विकसित भारत-2047’ टास्क फोर्स
राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति कविन्द्र गुप्ता ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों को साझा मंच पर लाने के लिए कुलाधिपति अंतर-विश्वविद्यालयीय ‘विकसित भारत-2047’ परिषद अथवा टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। सभी विश्वविद्यालयों को 10 दिनों के भीतर 100 दिवसीय रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला को टास्क फोर्स का समन्वयक विश्वविद्यालय नामित किया गया है।
शिमला
लोक भवन में राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में यह घोषणा की गई। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपने रोडमैप में नवाचार, उत्कृष्ट कार्य प्रणालियों और श्रेष्ठ प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित गतिविधियों का उल्लेख करें। उन्होंने सफल पहलों को दूसरे विश्वविद्यालयों के साथ साझा करने का भी आह्वान किया, ताकि सामूहिक प्रयासों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश और देश के विकास में योगदान दिया जा सके।
कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि ‘विकसित भारत-2047’ का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है। इसके तहत ज्ञान, नवाचार, कौशल, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों के क्षेत्रों में देश को आगे बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। उन्होंने टास्क फोर्स की गतिविधियों में विद्यार्थियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और पड़ोसी राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने को कहा, जिससे उनकी सफल कार्य प्रणालियों को समझकर अपनाया जा सके।
त्रैमासिक बैठकें और नियमित समीक्षा
राज्यपाल ने कहा कि परिषद अथवा टास्क फोर्स की बैठकें हर तीन महीने में आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों की मेजबानी विभिन्न विश्वविद्यालय बारी-बारी से करेंगे। उन्होंने इस व्यवस्था को परिणामोन्मुख बनाने और इसकी नियमित समीक्षा पर भी बल दिया। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को टास्क फोर्स के संचालन और विभिन्न विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसका उद्देश्य शोध, नवाचार, शैक्षणिक सुधार और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए साझा मंच उपलब्ध करवाना है।
राज्यपाल ने कृषि एवं बागवानी विश्वविद्यालयों से गुणवत्तापूर्ण पौधशालाएं विकसित करने और किसानों को उन्नत बीज तथा औषधीय पौधे उपलब्ध करवाने का आह्वान किया। उन्होंने शोध एवं नवाचार को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने पर जोर दिया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षणिक भ्रमण, विशेषज्ञों के साथ संवाद, अंतर-विश्वविद्यालयीय खेल गतिविधियां, सुव्यवस्थित पर्यटन कार्यक्रम और उद्योगों के सहयोग से व्यावहारिक प्रशिक्षण बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई गई।
युवाओं में नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कविन्द्र गुप्ता ने विश्वविद्यालयों से ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ में सक्रिय भागीदारी निभाने को कहा। उन्होंने नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता, परामर्श, खेल एवं फिटनेस, सांस्कृतिक गतिविधियों और सकारात्मक युवा सहभागिता पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों के सभी संकायों में नशा मुक्ति की शपथ दिलाने का सुझाव देते हुए उद्यमिता, रोजगारपरक कौशल और सुदृढ़ शोध संस्कृति को बढ़ावा देने पर भी बल दिया।
बैठक में कुलपतियों ने कौशल विकास, रोजगार एवं उद्यमिता, युवा स्वास्थ्य एवं कल्याण, खेल एवं फिटनेस, युवा नेतृत्व, नवाचार, शोध, राष्ट्रीय विकास और अंतर-विश्वविद्यालयीय सहयोग पर प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने लोक भवन की पत्रिका के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया। बैठक में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, डॉ. हरमिंदर सिंह बावा, डॉ. डी.के. वर्मा, डॉ. ललित कुमार अवस्थी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।