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Water Supply Scam / ठियोग में पानी आपूर्ति घोटाले की विजिलेंस जांच में नए खुलासे, टेंडर प्रक्रिया और कर्मचारियों की मिलीभगत

हिमाचलनाउ डेस्क • 17 Jan 2025 • 1 Min Read

शिमला के ठियोग विधानसभा क्षेत्र में पानी की आपूर्ति में करोड़ों की गड़बड़ी के मामले में विजिलेंस की जांच में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि टैंकरों से पानी की आपूर्ति के दौरान पंचायत प्रधान या सदस्य के हस्ताक्षर किए बिना ही दस्तावेज तैयार किए गए थे, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार यह अनिवार्य था। जल शक्ति विभाग के रिकॉर्ड में इन हस्ताक्षरों का अभाव है, जो जांच में गंभीर अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

फर्जी दस्तावेज और मिलीभगत:

पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी के इस मामले में ठेकेदारों पर आरोप हैं कि उन्होंने टेंडर की शर्तों को नजरअंदाज किया और स्टाफ की मिलीभगत से टेंडर आवंटित कराए। भले ही टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन थी, लेकिन इसमें ठेकेदार आपस में मिलकर टेंडर भरते थे, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध बन गई। विजिलेंस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज की है, और अब तक इस मामले में कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, जैसे कि ठेकेदारों को कब और किस तरह से टेंडर आवंटित किए गए थे, और वे कितने कामों में शामिल थे।

जांच में सामने आईं और भी अनियमितताएँ:

विजिलेंस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में जल शक्ति विभाग के निलंबित इंजीनियरों और कर्मचारियों की भूमिका को लेकर कई अनियमितताएं उजागर हुई हैं। इसमें यह बात सामने आई कि लेलू पुल से पानी की आपूर्ति के लिए टेंडर के बावजूद ठेकेदारों ने वहाँ से पानी भरकर सप्लाई नहीं की। इसके बजाय, टैंकर और पिकअप चालकों ने नालों से पानी भरकर सप्लाई की। इसके बाद, जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों ने ठेकेदारों के लिए फर्जी बिल तैयार किए, जिसमें निलंबित इंजीनियरों और लिपिक की लापरवाही सामने आई।

प्रक्रिया में लापरवाही:

इस मामले में, अधिशासी अभियंता ने जूनियर इंजीनियरों द्वारा तैयार किए गए बिलों को बिना जांचे ही आगे बढ़ा दिया और एसडीएम के पास भेज दिया। इसके बाद इन ठेकेदारों को पेमेंट जारी कर दी गई, जबकि आपूर्ति की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया।

विजिलेंस की पूछताछ:

विजिलेंस ने इस मामले में अब तक 90 लोगों से पूछताछ की है, जिनमें एसडीएम ठियोग, निलंबित इंजीनियर, टैंकर चालक और ठेकेदार शामिल हैं। इन सभी से बयान दर्ज किए गए हैं, और जांच प्रक्रिया जारी है। विजिलेंस की रिपोर्ट में मामले को दर्ज करने की सिफारिश की गई है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस गड़बड़ी में कई जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत है

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे मिलकर काम करने वाले ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों ने जनता के पैसों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। विजिलेंस की जांच में और भी अहम जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जो इस घोटाले के जाल को और भी स्पष्ट करेंगी।