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अपने पेशे के प्रति जुनूनी रहें- डॉ.आर.सी.अग्रवाल

PARUL • 5 Jan 2024 • 1 Min Read

उप महानिदेशक आईसीएआर ने विद्यार्थियों से संवाद कर उन्हें दी सलाह

HNN/कांगड़ा

चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक व राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचईपी) के राष्ट्रीय निदेशक डाक्टर आर.सी. अग्रवाल ने स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। बतौर मुख्य अतिथि डॉ. अग्रवाल ने युवाओं को सलाह दी कि प्रगति करने और मानवता के लाभ के लिए योगदान देने के लिए सीखना और जीवन जीने का जुनून होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नियमित अनुसंधान को नए विचारों और लीक से हटकर सोच द्वारा प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए। नवोन्मेष अनुसंधान के लिए धन की कोई कमी नहीं है। डॉ. अग्रवाल ने नए शोध विचारों पर चर्चा की जो वैश्विक चुनौतियों के लिए नए तरह के समाधान दे सकते हैं। उन्होंने छात्रों को नोबेल पुरस्कार विजेताओं और अन्य शीर्ष वैज्ञानिकों के साथ काम करने के अवसर खोजने का सुझाव दिया।

उन्होंने छात्रों और वैज्ञानिकों से बड़े सपने देखने और अपने विचारों को साकार करने के लिए कड़ी मेहनत करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों में छात्रों के संपर्क से उनके व्यक्तित्व में पूरी तरह से बदलाव आता है। यह उनकी दृष्टि को बढ़ाता है और उन्हें शैक्षणिक और अनुसंधान के मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करने और हल करने के लिए आश्वस्त करता है। उन्होंने कहा कि किसी भी चुने हुए पेशे में जुनून होना चाहिए।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय में संरक्षित कृषि और प्राकृतिक खेती पर उन्नत कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र ने अच्छा प्रदर्शन किया है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कृषि के लिए चुनौतियों पर चर्चा की। मुख्य अतिथि ने विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा लिखित सात प्रकाशनों का भी विमोचन किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति डॉ. डी.के. वत्स ने कहा कि कृषि का भविष्य प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिकों के हाथों में सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तक्षेप और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आने वाले समय में खेती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा किसानों को आधुनिक खेती में शामिल होने की जरूरत है। कुलपति ने एनएएचईपी के तहत संरक्षित कृषि और प्राकृतिक खेती पर एक परियोजना को मंजूरी देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का धन्यवाद किया। इसने विश्वविद्यालय को भविष्य के कृषि अनुसंधान के लिए कई सुविधाओं को आधुनिक बनाने में सक्षम बनाया है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि परियोजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी छात्र किसानों के कल्याण को समर्पित रूप से काम करेंगे। विशिष्ट अतिथि एनएएचईपी की राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अनुराधा अग्रवाल ने कहा कि संरक्षित कृषि और प्राकृतिक खेती के लिए विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट सुविधाएं विकसित की गई हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने उन्नत प्रशिक्षण के लिए छात्रों का चयन सावधानीपूर्वक किया है। उन्होंने बताया कि हमारा देश भी विश्व में विकसित है।

अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.के.उपाध्याय ने बताया कि विश्वविद्यालय के 44 छात्रों ने एनएएचईपी के तहत प्रतिष्ठित संस्थानों में अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रशिक्षण में भाग लिया। कार्यक्रम में कई छात्रों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रशिक्षण प्रायोजित करने और अपनी शोध विशेषज्ञता को समृद्ध करने के लिए एनएएचईपी को धन्यवाद दिया। विश्वविद्यालय में एनएएचईपी के प्रधान अन्वेषक डॉ. रणवीर सिंह राणा ने परियोजना की उपलब्धियों और योगदान के बारे में विस्तार से बताया। इस अवसर पर डॉ. अखिलेश शर्मा और डॉ.ऋषि महाजन ने भी संबोधित किया।