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अलर्ट! बैरा सिउल बांध / जनमानस को जलाशय और निचले इलाकों में नदी किनारों से दूर रहने की सलाह, जानिये वजह…

हिमाचलनाउ डेस्क | 16 दिसंबर 2024 at 4:56 pm

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Himachalnow / चंबा

चंबा, 16 दिसंबर 2024बैरा सिउल बांध के जलाशय का फ्लशिंग 18 दिसंबर 2024 को प्रातः 8:30 बजे से शुरू होगा, और यह प्रक्रिया लगभग 8 दिनों तक जारी रहेगी। इस दौरान बांध से निरंतर पानी छोड़ा जाएगा, जिससे निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की संभावना है।

फ्लशिंग प्रक्रिया का उद्देश्य और प्रभाव

बैरा सिउल पावर स्टेशन के महाप्रबंधक (सिविल), बांध परिसर के अनुसार, यह फ्लशिंग प्रक्रिया बांध के जलाशय को साफ करने और उसके जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए की जाती है। इस दौरान निरंतर पानी की निकासी की जाएगी, जिससे निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ सकता है, और इन इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

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निचले इलाकों में सतर्कता बरतने की अपील

महाप्रबंधक ने आम जनता और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे इस दौरान नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहें और जलाशय के आसपास न जाएं। फ्लशिंग प्रक्रिया के दौरान पानी का स्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके मद्देनज़र, लोगों को सतर्क रहने की सख्त सलाह दी गई है।

बांध के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका

फ्लशिंग प्रक्रिया का उद्देश्य बांध के जलाशय में जमा अवशेषों और मिट्टी को निकालना है, जिससे बांध की कार्यक्षमता में सुधार हो। इस प्रक्रिया से बांध के जलस्तर को भी नियंत्रित किया जाता है, जो भविष्य में जलवायु परिवर्तन और बाढ़ जैसी स्थितियों से बचाव के लिए सहायक होगा।

निचले इलाकों में सावधान रहने की सलाह

फ्लशिंग प्रक्रिया के दौरान, जलाशय से पानी की निरंतर निकासी के कारण नदी किनारे स्थित निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने का खतरा है। स्थानीय अधिकारियों ने इन इलाकों में चेतावनियाँ जारी कर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है।

निष्कर्ष: फ्लशिंग प्रक्रिया और सुरक्षा की महत्वता

बैरा सिउल बांध का फ्लशिंग 18 दिसंबर से शुरू होगा, और यह प्रक्रिया लगभग 8 दिनों तक चलेगी। इस दौरान निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ने की संभावना को देखते हुए, सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। प्रशासन और बांध प्रबंधन की ओर से सुरक्षा उपायों को लागू किया जा रहा है, और आम जनता से अपील की गई है कि वे जलाशय और नदी किनारे के इलाकों से दूर रहें।

यह फ्लशिंग प्रक्रिया बांध की सुरक्षा और कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ, संभावित बाढ़ की स्थिति से भी निपटने में सहायक होगी।

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